आगरालीक्स ..Agra News : आगरा के राज्यसभा सांसद रामजीलाल सुमन के राज्यसभा में विधेयक पर चर्चा के दौरान निजी अस्पतालों को गरीबों की मौत का सौदागर कहने पर आईएमए, आगरा ने क्या कहा जानेंपूरा मामला। ( Agra News: IMA, Agra Opposes SP MLA Ramji Lal Suman statement for Private Hospital’s bill & treatment)
राज्यसभा में विनियोग विधेयक 2026 पर चर्चा के दौरान सोमवार को सपा के राज्यसभा सांसद और आगरा के रहने वाले रामजीलाल सुमन ने देश में बदहाल सरकारी स्वास्थ्य सेवाएं और निजी अस्पतालों की मनमानी पर केंद्र पर निशाना साधा, कहा कि सरकार सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं पर जीडीपी का 2.5 प्रतिशत तक खर्च नहीं कर पा रही है, जीडीपी का 1.9 प्रतिशत बजट ही स्वास्थ्य सेवाओं के लिए दिया जा रहा है। वहीं, निजी अस्पताल मनमाफिक पैसा वसूल करहे हैं। कहा कि मरीज की मौत हो जाने के बाद भी निजी अस्पताल वेंटीलेटर पर रखे रहते हैं और पूरे पैसे जमा करने के बाद ही शव देते हैं। निजी अस्पताल गरीबों की मौत के सौदागर बने हुए हैं।
आईएमए आगरा ने किया विरोध
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन, आगरा के अध्यक्ष डॉ. पंकज नगाइच और सचिव डॉ. रजनीश मिश्रा प्रेसनोट जारी कर कहा है कि आईएमए आगरा निजी अस्पतालों के संबंध में दिए गए हालिया बयान की कड़े शब्दों में भर्त्सना करता है। इस प्रकार के गैर-जिम्मेदाराना और भ्रामक वक्तव्य न केवल देशभर के समर्पित चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों का मनोबल गिराते हैं, बल्कि आम जनता में भी अनावश्यक भय और अविश्वास का माहौल उत्पन्न करते हैं। निजी अस्पताल देश की स्वास्थ्य व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण स्तंभ हैं, जो सीमित संसाधनों के बावजूद निरंतर गुणवत्तापूर्ण सेवाएं प्रदान कर रहे हैं। ऐसे में उन्हें “गरीबों की लाशों के सौदागर” कहना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण, असंवेदनशील और तथ्यहीन है।
कुछ अपवादों क आधर पर कठघरे में ना करें खड़ा
आईएमए आगरा यह स्पष्ट करना चाहता है कि चिकित्सा सेवा एक मानवीय और नैतिक दायित्व है, जिसे डॉक्टर पूरी निष्ठा और ईमानदारी से निभाते हैं। कुछ अपवादों के आधार पर पूरे चिकित्सा समुदाय को कठघरे में खड़ा करना न्यायसंगत नहीं है।आईएमए के केंद्रीय नेतृत्व एवं राज्य इकाई से अपील करते हैं कि वे भी इस विषय पर स्पष्ट और सशक्त बयान जारी करें, इस तरह की टिप्पणियों की कड़ी निंदा करें, तथा संबंधित व्यक्ति से बिना शर्त सार्वजनिक माफी की मांग करें। साथ ही, हम यह भी अपेक्षा करते हैं कि जनप्रतिनिधि अपने वक्तव्यों में संयम बरतें और स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने के लिए रचनात्मक संवाद को बढ़ावा दें, न कि भ्रामक और विभाजनकारी बयानबाजी को।
फाइल फोटो