आगरालीक्स …Agra News: आगरा में सीएम योगी ने कहा शिक्षक कक्षा में रोचकता के साथ नहीं पढ़ाते हैं, कक्षा खाली होती जाती हैं लाइब्रेरी सूनी पड़ी हैं। गुरु पूर्णिमा से पहले शिक्षकों व उनके परिजन सहित 7.50 लाख लोगों को कैशलेस चिकित्सा की सुविधा देने के लिए डॉ. भीमराव आंबेडकर विवि के शिवाजी मंडपम में आयोजित कार्यक्रम में सीएम योगी ने कहा कि छात्र भटकें नहीं, इसके लिए काम करना है।
सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रदेश सरकार उच्च शिक्षा संस्थानों के शिक्षकों एवं उनके परिवारों को बेहतर स्वास्थ्य सुरक्षा प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री शिक्षक कैशलेस चिकित्सा योजना शिक्षकों के लिए महत्वपूर्ण एवं ऐतिहासिक पहल है, जिसके माध्यम से उन्हें गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सुविधाओं के साथ व्यापक बीमा सुरक्षा भी उपलब्ध होगी। भारतीय संस्कृति में गुरु केवल शिक्षा देने वाला नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण का आधार होता है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार शिक्षा और शिक्षकों के सम्मान के लिए निरंतर कार्य कर रही है तथा यह योजना उसी संकल्प की एक महत्वपूर्ण कड़ी है। तक्षशिला विश्वविद्यालय के प्रसिद्ध वैद्य जीवक का उल्लेख करते हुए कहा कि उनके आचार्य ने उन्हें वन में जाकर ऐसी वनस्पति खोजने का दायित्व दिया था, जिसमें कोई औषधीय गुण न हो। जीवक ने अनेक दिनों और महीनों तक पूरे वन का अध्ययन किया तथा लौटकर अपने आचार्य से कहा नास्ति मूलम् अनौषधम अर्थात ऐसी कोई वनस्पति नहीं है जिसमें औषधीय गुण न हो। इस पर आचार्य ने प्रसन्न होकर कहा कि वे अपनी परीक्षा में सफल हुए। ने कहा कि भारत के ऋषियों ने इसी सत्य को इन शब्दों में व्यक्त किया है “अमंत्रमक्षरं नास्ति, नास्ति मूलमनौषधम्। अयोग्यः पुरुषो नास्ति, योजकस्तत्र दुर्लभः अर्थात कोई अक्षर ऐसा नहीं जिससे मंत्र न बन सके, कोई वनस्पति ऐसी नहीं जिसमें औषधीय गुण न हों और कोई मनुष्य ऐसा नहीं जिसमें योग्यता न होय आवश्यकता केवल ऐसे योग्य मार्गदर्शक की होती है, जो उसकी प्रतिभा को पहचानकर उसे सही दिशा दे सके। यही भूमिका एक शिक्षक निभाता है। शिक्षक ही विद्यार्थी के व्यक्तित्व, प्रतिभा और संस्कारों को विकसित कर उसे राष्ट्र निर्माण के योग्य बनाता है। इसलिए भारत की संस्कृति में गुरु को सर्वोच्च स्थान दिया गया है। शिक्षक का दायित्व केवल पाठ्यक्रम पढ़ाना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को सही मार्ग, सही दृष्टि और श्रेष्ठ जीवन मूल्यों से जोड़ना भी है, ताकि कोई छात्र भटकाव का शिकार न बने। मा0 मुख्यमंत्री ने वर्तमान शैक्षणिक वातावरण पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आज पठन-पाठन की संस्कृति कमजोर होती जा रही है। पहले विद्यार्थियों को पाठ्यपुस्तकों के साथ समाचार-पत्र, संदर्भ ग्रंथ तथा ज्ञानवर्धक साहित्य पढ़ने के लिए प्रेरित किया जाता था। पुस्तकालय विद्यार्थियों की बौद्धिक गतिविधियों के प्रमुख केंद्र होते थे, लेकिन आज अनेक पुस्तकालयों में अपेक्षित सक्रियता दिखाई नहीं देती। उन्होंने शिक्षकों से विद्यार्थियों में अध्ययन, शोध और पुस्तक-पठन की आदत विकसित करने का आह्वान किया। शिक्षक को केवल कक्षा तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि समाज, संस्कृति और अपने संस्थान के इतिहास से भी गहरा जुड़ाव रखना चाहिए। जिस विश्वविद्यालय में हम कार्य करते हैं, उसके संस्थापकों, पूर्व कुलपतियों, विशिष्ट प्राध्यापकों तथा प्रतिष्ठित पूर्व विद्यार्थियों (एलुमनाई) के योगदान की जानकारी प्रत्येक शिक्षक और विद्यार्थी को होनी चाहिए। इससे संस्थान के प्रति अपनत्व और गौरव की भावना विकसित होती है। मा0 मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रत्येक शिक्षक को शैक्षणिक सत्र की पहली कक्षा को प्रेरणादायी बनाना चाहिए। केवल पाठ्यक्रम प्रारंभ करने के बजाय विद्यार्थियों का विषय से परिचय कराते हुए उनमें जिज्ञासा, उत्साह और सीखने की रुचि विकसित करनी चाहिए। जब शिक्षक रोचक और प्रेरक वातावरण तैयार करता है, तब विद्यार्थियों का विषय और कक्षा, दोनों के प्रति स्वाभाविक आकर्षण बढ़ता है तथा शिक्षा अधिक प्रभावी और परिणामकारी बनती है।
सोशल मीडिया पर अच्छे कंटेंट डालें शिक्षक
आज का विद्यार्थी स्मार्टफोन के माध्यम से देश-दुनिया की जानकारी प्राप्त कर रहा है। ऐसे में यह आवश्यक है कि वह सही और प्रामाणिक जानकारी की पहचान करना सीखे। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर उपलब्ध प्रत्येक सामग्री सत्य हो, यह आवश्यक नहीं है। जिस विषय पर अधिक सामग्री उपलब्ध होती है, उसे लोग अक्सर सत्य मान लेते हैं, जबकि वास्तविकता इससे भिन्न भी हो सकती है।उन्होंने शिक्षकों से आह्वान किया कि वे अपने ज्ञान और अनुभव का उपयोग करते हुए सोशल मीडिया पर सकारात्मक, तथ्यपरक और प्रेरणादायी सामग्री साझा करें। अच्छे विचार, श्रेष्ठ उद्धरण और रचनात्मक सामग्री के माध्यम से समाज को सकारात्मक दिशा दी जा सकती है। उन्होंने कहा कि भारत ने लंबे संघर्ष के बाद स्वतंत्रता प्राप्त की है। इसलिए प्रत्येक नागरिक और विशेष रूप से शिक्षकों का दायित्व है कि वे राष्ट्रविरोधी दुष्प्रचार, भ्रामक सूचनाओं और समाज को विभाजित करने वाले किसी भी षड्यंत्र के प्रति विद्यार्थियों को जागरूक करें तथा राष्ट्रहित, सामाजिक समरसता और सकारात्मक सोच को मजबूत बनाने में अपनी सक्रिय भूमिका निभाएं।