आगरालीक्स…जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाना क्यों बन रहा टेढ़ी खीर. तीन से चार महीने चक्कर लगाने पड़ रहे लोगों को…सीएम योगी तक पहुंची आगरा की यह समस्या
महापौर हेमलता दिवाकर कुशवाहा ने शनिवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुख्यमंत्री कार्यालय में मुलाकात कर जनहित के मुद्दों पर चर्चा की। इस दौरान महापौर ने कहा कि शहर के नागरिकों को जन्म-मृत्यु प्रमाण-पत्र बनवाने में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। नियमानुसार 21 दिन की समयावधि के बाद जांच कराने एवं आदेश जारी करने का अधिकार उप जिलाधिकारी में निहित किया गया है, परन्तु उप जिलाधिकारी स्तर से जांच कराने एवं जांच के बाद सक्षम आदेश पारित करने में नियमावली में दिये गये समय से अधिक समय लग रहा है। आमजन को तीन से चार महीने तक कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। जिसके कारण आम नागरिक नगर निगम में व्यापक शिकायत करते हैं तथा सम्पूर्ण दोष नगर निगम पर लगाते हैं।
महापौर ने मुख्यमंत्री के समक्ष कहा कि वर्तमान प्रकिया में जटिलता समाप्त करने की आवश्यकता है तथा पूर्व व्यवस्था में नगर निगमों में उप निबन्धक (जन्म-मृत्यु) को एक महीने की अवधि तक बिना शपथ पत्र के लिए रजिस्ट्रेशन करने तथा एक वर्ष की अवधि के अन्दर शपथ पत्र के माध्यम से रजिस्ट्रेशन का अधिकार था व एक वर्ष की अवधि के उपरान्त अपर जिला मजिस्ट्रेट को अधिकार था। इस व्यवस्था के कारण किसी भी प्रकार की कठिनाई आम नागरिकों को नही होती थी। परन्तु नयी पद्धति / प्रक्रिया के अनुसार 21 दिन की अवधि के उपरान्त रजिस्ट्रेशन करने का अधिकार उप जिलाधिकारी में निहित किया गया है। चूँकि उप जिलाधिकारी के पास अपनी तहसील का बहुत कार्य होता है जिसके कारण इन कार्यों के लिए उनके पास समय का अभाव रहता है और जन्म-मृत्यु के प्रकरण लम्बित हो जाते हैं।
जनहित में प्रक्रिया में बदलाव हो जाये तो काफी हद तक आम नागरिकों को परेशानियों से निजात मिल सकती है। मेरा सुझाव है कि नगर निगम में एक पी०सी०एस० अधिकारी की तैनाती रहती है जिनको एक वर्ष तक की अवधि प्रकरणों के निस्तारण के लिए अधिकृत किया जा सकता है तथा एक वर्ष से अधिक समय होने पर जिलाधिकारी के अधीन किसी भी अपर नगर मजिस्ट्रेट को जन्म-मृत्यु के प्रकरणों को सुनने, निर्णय किये जाने का अधिकार दिया जा सकता है। वर्तमान में जन्म-मृत्यु की जो ऑनलाइन साइड है, वह भी बहुत ही धीमी गति से कार्य कर रही है। अतः उपरोक्त के दृष्टिगत सादर अनुरोध है कि नगर निगमों के स्तर पर प्रकिया में बदलाव किये जाने पर विचार करते हुए सम्बन्धित अधिकारियों को निर्देशित करने की कृपा करें।