आगरालीक्स…आगरा में डॉ. भीमराव आंबेडकर यूनिवर्सिटी को स्थापना के 99 साल हुए पूरे..पिछले साल NAAC में A+ ग्रेड पाकर रचा इतिहास. अब कुलपति ने बताईं भविष्य की योजनाएं. दो करोड़ का अनुदान भी मिला…
डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय आगरा के 99वें स्थापना दिवस की पूर्व संध्या पर सोमवार को विश्वविद्यालय के विवेकानंद परिसर (खंदारी कैंपस) स्थित अतिथि गृह में विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो.आशु रानी ने पत्रकार वार्ता को संबोधित किया। इसमें उन्होंने पत्रकारों के साथ विश्वविद्यालय के 2024-25 सत्र के शैक्षणिक, अनुसंधान, प्लेसमेंट और बुनियादी उपलब्धियों पर चर्चा की। इस दौरान में विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक डॉ ओम प्रकाश, IQAC निदेशक प्रो संजय चौधरी, अधिष्ठाता छात्र कल्याण प्रो भूपेंद्र स्वरूप शर्मा और डीन अकादमिक डॉ मनु प्रताप सिंह, जनसम्पर्क अधिकारी पूजा सक्सेना, तरुण श्रीवास्तव, डॉ.स्वेतलाना, डॉ संदीप और दीपक कुलश्रेष्ठ उपस्थिति रहे। प्रेसवार्ता का आयोजन विश्वविद्यालय जनसम्पर्क विभाग ने किया।शैक्षणिक और अनुसंधान उपलब्धियाँ
गत वर्ष विश्वविद्यालय ने कुलपति के नेतृत्व में NAAC में A+ ग्रेड प्राप्त कर इतिहास रचा, जिसकी सफलता में कई शैक्षणिक और अन्य गतिविधियाँ शामिल हैं। कुल 236 शैक्षणिक गतिविधियों के साथ संकाय सदस्यों द्वारा 340 शोध-पत्र एवं 118 पुस्तकें/अध्याय प्रकाशित हुए है। साथ ही 32 पेटेंट प्रकाशित हुए हैं और 82 अनुसंधान परियोजनाएं चल रही हैं। 536 राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन, व्याख्यान एवं प्रस्तुतियाँ सम्पन्न हुईं, जिनमें 64 अंतरराष्ट्रीय शामिल रहीं। विश्वविद्यालय में कुल 695 छात्रों को प्लेसमेंट प्राप्त हुआ और 18 कंसल्टेंसी परियोजनाएं सफलतापूर्वक पूर्ण की गई। अंतरराष्ट्रीय विद्यार्थियों, जिसमें रूसी विद्यार्थियों ने विश्वविद्यालय में हिंदी भाषा सीखना प्रारंभ किया।
समझौता ज्ञापन (एम.ओ.यू.)
विश्वविद्यालय ने देश-विदेश की प्रतिष्ठित संस्थाओं के साथ सहयोग के नए आयाम स्थापित किए। सत्र 2024-25 के दौरान 25 से अधिक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoUs) पर हस्ताक्षर किए गए हैं, जिनका उद्देश्य शैक्षणिक, अनुसंधान और तकनीकी क्षेत्रों में सहयोग को प्रोत्साहित करना है। इनमें शामिल हैं: TCS ION, Aspire Knowledge and Skills India Pvt- Ltd., बुंदेलखंड विश्वविद्यालय झांसी, Pangasinan State University, Philippines, Inflibnet, राधे ट्रेनिंग एंड प्लेसमेंट इंस्टीट्यूट फिरोजाबाद, वृंदावन शोध संस्थान, उज़्बेकिस्तान स्टेट वर्ल्ड लैंग्वेज यूनिवर्सिटी, उज़्बेकिस्तान, और मॉस्को स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ इंटरनेशनल रिलेशंस, मॉस्को रशिया। विश्वविद्यालय के पास कुल 75 सक्रिय एम.ओ.यू.हैं, जो राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के साथ सहयोग के दृढ़ और विस्तृत नेटवर्क को दर्शाते हैं। इन सहयोगों का उद्देश्य अकादमिक गतिविधियों का पारस्परिक आदान-प्रदान एवं संस्थागत विकास है।
विश्वविद्यालय में नव निर्माण और नवीनीकरण का कार्य सम्पन्न किया गया है। नेताजी सुभाष चंद्र बोस परिसर में मेजर ध्यानचंद स्टेडियम का निर्माण हुआ है। नई स्मार्ट क्लासरूम, लेक्चर रिकॉर्डिंग सुविधा, नव निर्मित मीटिंग हॉल और कॉन्फ्रेंस रूम भी जिसमें शामिल है। गणित, जीवन विज्ञान, इतिहास, संस्कृत भवन व कृषि विभाग में नई प्रयोगशालाएँ और संग्रहालय का निर्माण हुआ है। विवेकानंद परिसर में नया खेल क्षेत्र और स्मार्ट लैब्स और केंद्रीय पुस्तकालय का नवीनीकरण एवं RFID प्रणाली की भी शुरुआत हुई है।
भविष्य की योजनाएं (सदी समारोह 2027 की तैयारी)
विश्वविद्यालय को सुचारू रूप से कार्यरत और इसके अत्याधुनिक विकास हेतु कई संसाधन प्रस्तावित हैं। परीक्षा, मूल्यांकन आदि में तकनीकी का समावेश कर परीक्षा पारदर्शी और निष्पक्ष होंगी। रियल-टाइम परिणामों की सुविधा और मूल्यांकन की व्यवस्था भी लागू की जाएगी। साथ ही 1000 सीटों की ऑनलाइन परीक्षा हेतु संसाधनों पर कार्य किया जा रहा है। डिजिटल पुस्तकालय के लिए भी कार्य किए जा रहे हैं जो छात्रों और शोधकर्ताओं के लिए एक अमूल्य संसाधन है। इसमें पुस्तकें, शोध पत्र, जर्नल, और अन्य अकादमिक सामग्री डिजिटल रूप में उपलब्ध होंगी।विश्वविद्यालय की वैश्विक रैंकिंग प्राप्त करने के लिए अनुसंधान, शैक्षिक गुणवत्ता, और अंतरराष्ट्रीय साझेदारी पर भी कुलपति जी द्वारा कार्य किया जा रहा है।
सत्र 2025-26 में 100 से अधिक अंतर्राष्ट्रीय छात्रों के प्रवेश पत्र आवेदन प्राप्त हुए हैं। इन अंतरराष्ट्रीय छात्रों के लिए विशेष सुविधा जैसे कि अंग्रेजी में कक्षाएँ, काउंसलिंग सेवाओं, आदि जैसी सुविधाओं के लिए विश्वविद्यालय अग्रसर है। भारतीय ज्ञान प्रणाली पर राष्ट्रीय केंद्र (National Center on Indian Knowledge System) और अंतराष्ट्रीय सहयोग के साथ शोध को प्रोत्साहन (Promotion of Research with International collaboration) जैसी प्रणाली पर भी विश्वविद्यालय कार्यरत है।
अनुदान प्राप्ति
केंद्र व राज्य सरकार की "पीएम-उषा योजना" के अंतर्गत विश्वविद्यालय को 2 करोड़ का अनुदान प्राप्त हुआ है, जिसका उपयोग निर्माण, नवीनीकरण और उपकरण खरीद में किया जा रहा है।