आगरालीक्स बेटा डॉक्टर और इंजीनियर भले न बन पाओ लेकर पढ़ाई के बोझ तले मत दबना, सुसाइड मत करना, तुझे मैं कोटा नहीं भेजुंगा, आगरा में ही तैयारी कराउंगा।

बेटा मैं समझ सकता हूं कि हर बच्चा डॉक्टर और इंजीनियर नहीं बन सकता है लेकिन अधिकांश बच्चे और उनके परिजन चाहते हैं कि बेटा डॉक्टर बने, आईआईटी से इंजीनियरिंग करे। इसलिए तो अब 10 वीं के बाद से ही तैयारी शुरू करा देते हैं लेकिन यह कच्ची उम्र होती है, यह उम्र तो लाड़ प्यार और मम्मी पापा से डांट खाने की है। मां की आवाज से सुबह सुबह उठने की उम्र में कोचिंग भेज दूं तो क्या होगा यह समझ सकता हूं। पढ़ाई एक बोझ बनकर रह जाएगी। इसलिए मैं तुम्हें अपने पास रखकर ही तैयारी कराउंगा। यह एक पिता का कहना है जो अपने बेटे को नीट की तैयारी के लिए कोटा भेजना चाहते थे लेकिन जिस तरह से कोटा में आए दिन कोचिंग सेंटर में तैयारी कर रहे छात्र सुसाइड कर रहे हैं उन्होंने अपने बेटे को कोटा नहीं भेजा। स्थानीय कोचिंग में ही तैयारी करा रहे हैं।
कोटा में छात्रों की मौत के बाद दो महीने तक टेस्ट पर रोक
कोटा में 24 घंटे में कोचिंग में पढ़ने वाले दो बच्चों की मौत के बाद प्रशासन ने दो महीने तक सभी कोचिंग में टेस्ट लेने से रोक लगा दी है। कोई भी कोचिंग संचालक छात्रों के टेस्ट नहीं लेगा। ऐसा इसलिए किया गया है कि टेस्ट के चलते ही छात्र दबाव में आ रहे हैं।
आगरा से बड़ी संख्या में तैयारी करने कोटा जाते हैं बच्चे
कोटा से नीट और जेईई की तैयारी करने के लिए आगरा से बड़ी संख्या में बच्चे जाते हैं। कोटा में सुसाइड के मामले बढ़ने के बाद जिन परिजनों ने अपने बच्चों को तैयारी करने के लिए भेजा है वे उनसे नियमित बात कर रहे हैं। बच्चों से कह रहे हैं कि पढ़ाई का दबाव न लें, कोई समस्या लगे तो घर लौट जाएं। घर पर रहकर भी तैयारी कर सकते हैं।