आगरालीक्स…आगरा पुलिस ने 500 लग्जरी कारें चुराने वाला हाइटेक गैंग पकड़ा. सिर्फ तीन मिनट और लग्जरी कार चोरी. इनके हाइटेक तरीके को देख आप भी रह जाएंगे दंग. पुलिस को दिखाया लाइव डेमो. 5 चोरी की लग्जरी कार भी बरामद
आगरा की थाना खंदौली व एसओजी टीम को बड़ी सफलता हाथ लगी हे. पुलिस ने संयुक्त आपरेशन में कार्रवाई करते हुए लग्जरी कार चोरी की घटनाओं को अंजाम देने वाले 6 अंतर्राज्जीय बदमाशों को मुठभेड़ में अरेस्ट किया है. पुलिस ने इनके कब्जे से चोरी की पांच लग्जरी कार, दो तमंचा मय खोखा कारतूस व चार अदद फरसानुमा चाकू और गाड़ी चोरी करने के उपकरण बरामद किए हैं. इनका लग्जरी कार चोरी करने का हाईटेक तरीका था जिसका इन्होंने पुलिस के सामने डेमो भी दिखाया.
इस तरह आए पकड़ में
शनिवार रात को एसओजी टीम व थाना खंदौली पुलिस क्षेत्र में गश्त पर थी. झरना नाला के पास मुखबिर से सूचना मिली कि वाहन चोरों का एक गिरोह आज आगरा आया हुआ हे. ये चोरों का गिरोह दो गाड़ियों को इधर सकी तरफ ही आ रहा है. इस सूचना पर तत्काल पुलिस टीम ने बैरियर लगाकर चेकिंग शुरू कर दी. कुछ समय बाद दो गाड़ियां आती हई दिखीं. पुलिस ने रुकने का इशारा कयिातो गाड़ी सवार सकपका गए और कुछ दूर पहले रोककर पीछे मोड़कर भागने का प्रयास करने लगे. इस पर पुलिस ने चारों ओर से इन्हें घेरने का प्रयास किया. खुद को घिरा देख बदमाश कार से बाहर आ गए और पुलिस पर फायर किया. पुलिस अपना बचाव करते हुए चारों ओर से घेरकर छह बदमाशों को अरेस्ट कर लिया. पुलिस ने मौके से इनके पास से दो कार, दो तमंचा मय खोखा कारतूस, चार अदद फरसानुमा चाकू, गाडी चोरी करने के उपकरण बरामद किए. पुलिस ने इनकी निशानदेही पर तीन और गाड़ियां बरामद की हैं.
ये हैं पकड़े गए बदमाशों के नाम
अनिल पवार
संदीप नागर
विक्रांत शर्मा उर्फ विक्की
अतुल यादव
आशुतोष यादव
अंशुमन प्रताप
हाइटेक तरीके से करते थे लग्जरी गाड़ियों को चोरी
पुलिस पूछताछ में बदमाशों ने बताया कि हम सभी कभी एक साथ और कभी अलग—अलग होकर गाड़ियों को चोरी करते हैं. चोरी की गाड़ियों की खरीद व बिक्री का काम संदीप नागर करता हे. हम सभी लोग दिन में गाड़ियों की रेकी कर लेते हैं, उसके बाद रात में हम लोग यही सब सामान लेकर निकलते हैं. सबसे पहले हम लोग all in key से गाड़ी का मेन दरवाजा खोते हैं, अगर कभी दरवाजा न खुले तो हम सब्बल से शीशा तोड़ देते हैं. गाड़ी के लॉक को खोलकर हम बोनट खोलते हैं और बोनट में लगे हुए सायरन को तोड़ देते हैं ताकि गाड़ी आवाज न करे. इसके बाद स्अेयरिंग के नीचे लगा हुआ कवर खोलकर कपलर लगाकर गाड़ी के करेंट को डायरेक्ट करते देते हैं जिससे गाड़ी में ignition आ जाता है. इसके बाद डिवाइस को कपलर में लगाकर गाड़ी की चाभी की प्रोग्रामिंग बना लेते हैं. उसके लिए ब्लैंक key की जरूरत पड़ती है. ब्लैंक चाभियों को हम लोग आनलाइन मंगवा लेते हैं. बलैंक चाभी की प्रोग्रामिंग होते ही गाड़ी उस चाभी से स्टार्ट हो जाती है और हम लोग गाड़ी को ले जाते हैं. इस पूरे काम में हमको दो से तीन मिनट लगते हैं. गाड़ी को सुरक्षित जगह पर ले जाने के बाद हम लोग उसमें टार्च से जीपीएस ढूंढते हैं अगर जीपीएस लगा होता है तो उसे तोड़कर फेंक देते हैं और कुछ दिन तक वहीं सुरक्षित जगह खड़ी रखते हैं या जगह बदलते रहते हैं ताकि पकड़े न जाएं. जीपीएस अक्सर गाड़ी में ऐसी जगह पर लगा रहता है जहां गाड़ी में हमेशा करेंट चालू रहता है जेसे कि गाड़ी की रूफलाइट में हमेशा करेंट रहता है इससलिए अक्सर जीपएस के तार रूफलाइट के पास से जुड़े रहते हैं.
पूछताछ में बदमाशों ने बताया कि गाड़ी चोरी करने के बाद हम लोग गाड़ी को संदीप को बेच देते हैं और संदीप ही ग्राहकों को गाड़ी बेचता है. संदीप हमारे साथ गाड़ी चुराने जाता है. हम पांच लोग गाड़ियों को चुराकर लाने का काम करते हैं. संदीप चोरी की गाड़ियों की खरीद एवं बिक्री करता है. हम लोगों का गैंग चोरी की 500 गाड़ियों को अब तक दूसरे राज्य में बेच चुका है. गिरफ्तारी के बाद सरगना ने पुलिस को कार चोरी का लाइव डेमो करके भी दिखाया.
यू—टृयूब से सीखकर बनाते थे नकली आरसी
पुलिस पूछताछ में ये भी पता चला है कि आरोपी संदीप गाड़ियों को बेचने का काम करता है तो वहीं अनिल चोरी के साथ फर्जी आरसी बनाने का काम करता था. इसके लिए वो यू—ट्यूब का सहारा लेता था. जिस गाड़ी को चोरी करते थे, उसी मॉडल की दूसरी गाड़ी का नंबर सड़क से गुजरती हुई गाड़ियों से देखते थे. इसके बाद इंजन और चेसिस नंबर गूगल पर सर्च करके निकालते थे. इसके बाद फर्जी आरसी कम्प्यूटर की मदद से बना लेते थे. इसमें उनका सहयोग बुलंदशहर का रिजवान, ताज, रिंकू, दिल्ली का सरबजीत करते हैं. बदमाशों ने बताया कि चोरी की गाड़ियां वे बिहार, असोम, पश्चिम बंगाल और ओड़िशा के अलावा नेपाल तक बेचते थे.