आगरालीक्स…देश का विकास उसके करदाताओं पर. आगरा में प्रधान आयकर आयुक्त अपर्णा करन ने कहा— विभाग हमेशा व्यापारियों व उद्यमियों की आयकर संबंधी समस्याओं को निस्तारण करने के लिये हमेशा प्रतिबद्ध
आगरा में शुक्रवार को आयकर विभाग की ओर से नेशनल चैम्बर ऑफ इंडस्ट्रीज एंड कॉमर्स के सहयोग से आयकर अधिनियम एवं टेक्सपेयर सर्विस विषय पर एक आउटरीच प्रोग्राम एवं इन्टरेक्टिव संवाद आयोजित किया गया। कार्यक्रम में करदाताओं को आयकर अधिनियम से सम्बन्धित नवीनतम प्रावधानों, अनुपालन प्रक्रियाओं एवं करदाता सेवाओं के बारे में विस्तृत जानकारी प्रदान की गई। अधिकारियों ने करदाताओं के प्रश्नों के उत्तर देकर उनकी शंकाओं का समाधान भी किया। सभी ने आयकर विभाग के जागरुकता एवं करदाता सेवाओं को सशक्त बनाने के प्रयासों की सराहना की। विभाग की तरफ से प्रधान मुख्य आयकर आयुक्त अपर्णा करण, प्रधान आयकर आयुक्त आयुक्त—1 अनुपम कान्त गर्ग, प्रधान आयकर आयुक्त (प्रशासन) एसएस भदौरिया, रेंजाधिकारी, आयकर अधिकारी अपने आयकर निरीक्षक के साथ मौजूद रहे।प्रधान मुख्य आयकर आयुक्त अपर्णा करन ने कहा कि विभाग हमेशा व्यापारियों व उद्यमियों की आयकर संबंधी समस्याओं को निस्तारण करने के लिये हमेशा प्रतिबद्ध हैं आज विभाग के पास ऐसी तकनीकी है जिसे हमें टैक्स डाटा उपलब्ध हो जाता है। हम सभी को कर देकर देश की भागीदारी में अपना सहयोग प्रदान करना चाहियें। विजन 2047 मे करदाताओं की सहयोग की अहम भूमिका निभायेगे। हम सभी का कर्तव्य है कि कर सही तरीेके से भरें। विभाग आपके साथ मैत्रीपूर्ण संबंध रखता है। किसी भी देश का विकास उसके करदाताओ पर निर्भर करता है। कर भरिये और देश के योगदान में भागीदार बनिये। चैम्बर द्वारा प्रेषित समस्याओं व सुझावों को प्रधान मुख्य आयकर आयुक्त द्वारा बहुत ही ध्यानपूर्वक सुना गया व उनपर शीघ्र सकारात्मक कार्यवाही करने का आश्वासन दिया गया।
चैम्बर अध्यक्ष संजय गोयल ने कहा कि आगरा ताज संरक्षित क्षेत्र के अंतर्गत आता है। आगरा में किसी भी नये उद्योगा को लगाने व उसके विस्तारीकरण किया जाना पूर्णतः प्रतिबंधित है इसलिये हमारा सुझाव है कि प्रत्यक्ष कर संग्रह लक्ष्य निर्धारित करते समय आगरा की स्थिति को ध्यान में रखते हुए कर वसूली के क्षेत्र में राहत प्रदान की जाये। चैम्बर के पूर्व अध्यक्ष एवं आयकर प्रकोष्ठ के चेयरमैन अनिल वर्मा ने अपील के प्रभावी होने के बाद धन वापसी जारी करने में देरी होने पर प्रकाश डालते हुए कहा कि अपील के फैसले करदाताओं के पक्ष में आने के बाद भी, उन्हें मिलने वाली धनराशि तुरंत जारी नहीं की जाती। इस देरी से नकदी प्रवाह पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है और करदाताओं को काफी कठिनाई होती है। हम सुझाव है कि अपील के बाद धनराशि की प्रक्रिया और जारी करने के लिए एक निश्चित समयसीमा निर्धारित की जाए। प्रार्थना जलान ने कहा कि कई ट्रस्ट जिन्हें 30 सितंबर, 2025 तक 12ए और 80जी पंजीकरण का नवीनीकरण कराना था, त्योहारी मौसम और कर पेशेवरों के रिटर्न दाखिल करने और कर लेखापरीक्षा में व्यस्त रहने के कारण ऐसा करने में विफल रहे हैं। सीबीडीटी को ट्रस्टों के लिए 12ए और 80जी पंजीकरण के नवीनीकरण की समय सीमा 30 सितंबर, 2025 से आगे बढ़ा देनी चाहिए।आयकर प्रकोष्ठ की को-चेयरमैन राजकिशोर खंडलेवाल ने कहा कि अपीलीय आदेश अक्सर करदाताओं द्वारा लिखित दलीलों और साक्ष्यों पर उचित विचार किए बिना सतही तौर पर पारित कर दिए जाते हैं। इससे न्याय के सिद्धांतों का हनन होता है और अनावश्यक मुकदमेबाजी को बढ़ावा मिलता है। हम सुझाव है कि तर्कसंगत और स्पष्ट आदेश जारी करने के लिए निर्देश दिए जाएं, जिनमें प्रस्तुत दलीलों का उचित समाधान किया गया हो।