आगरालीक्स…आगरा में वीवीआईपी मूवमेंट के दौरान स्ट्रीट डॉग्स को पकड़कर कैचिंग वैन में बेहरमी से ठूंसकर ले जाने का विरोध. एनिमल लवर्स ने लगाए गंभीर आरोप. छह दिन के पिल्लों को छोड़ उनकी मां को ले गई टीम
एक जून को आगरा में एक ओर जहां वीवीआईपी मेहमानों का स्वागत सत्कार किया जा रहा था, उनके स्वागत में ग्रीन कारपेट बिछाया जा रहा था तो वहीं दूसरी ओर निराश्रित और असहाय बेजुबानों को कैद कर नगर निगम की टीम उनको एबीसी सेंटर ले जा रही थी. स्ट्रीट डॉग्स के साथ की गई इस बेरहमी की जानकारी दी है विनीता शर्मा (फीडर) ने जो कि निराश्रित पशुओं की सेवा करने वाले नागरिकों के एक समूह की सदस्य हैं. उन्होंने कहा कि इनमें एक ऐसी बेजुबान मां भी थी जिसने छह दिन पहले ही अपने बच्चों को जन्म दिया था. नगर निगम की केचिंग वैन में उस बेजुबान मां को भी ठूंस कर ले जाया गया और उसके बच्चे अपनी मां के लिए तरसते रह गए. इस संबंध में टीम के साथ कलक्ट्रेट में एबीसी संचालकों के खिलाफ प्रदर्शन किया गया और डीएम को एक ज्ञापन भी दिया गया. डीएम अरविंद मलप्पा बंगारी ने उनकी शिकायत सुनने के बाद नगर आयुक्त से जांच कर कार्रवाई करने को कहा है.कलक्ट्रेट में प्रदर्शन करने वाली डॉ. रजनी भारती, नीतू गुप्ता, विनीता शर्मा (फीडर), पवन, पलक, गरिमा शर्मा, राकेश, रवि, आशु, राकेश चौहान, पंकज सिकरवार और सोनू ने हाथों में नारे लिखे तख्तियों के साथ सभी का ध्यान खींचा. डीएम ने इन सभी पशु प्रेमियों से मुलाकात की. इस पर टीम ने डीएम को एक पत्र भी दिया. पत्र में आरोप लगाया कि एक जून को शाहगंज क्षेत्र से लगभग 35—40 स्ट्रीट डॉग्स को बेहरमी से कूड़े की तरह उठाया गया और कैचिंग वैन (यूपी 31 एटी 6270) में बिना टैगिंग के उन्हें 3—4 घंटे तक प्यासा रखा गया. इन पशु प्रेमियों ने कहा कि कैचिंग वैन को रोकने का प्रयास किया गया लेकिन वो बिना परवाह किए ही वहां से निकल भाग निकले. उन्होंने कहा कि इन डॉग्स में एक बेजुबान मां भी थी जिसने कुछ दिन पहले ही बच्चों को जन्म दिया था लेकिन टीम ने उस मां को अपने बच्चों से अलग कर दिया है.
पत्र में आरोप लगाया कि इससे पहले तीन अप्रैल 2025 को डॉ. रजनी भारती की देखरेख में रह रहे डॉग्स को नगर निगम ने उठाया लेकिनअब ततक उनकी कोई जानकारी नहीं दी गई. जब नगर निगम से इस संबंध में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि उन्हें छोड़ दिया गया है लेकिन कोई प्रमाण नहीं उपलब्ध कराया. इसी प्रकार 6 अप्रैल 2025 को फ्रेेंड्स रॉयल अपार्टमेंट से उठाए गए तनीष्ज्ञा के डॉग्स भी आज तक नहीं लौटै हैं. 31 मई 2025 को हींग की मंडी से उठाया गया डॉग भी लापता है.
एबीसी सेंटर में बेजुबानों के साथ बरती जा रही अमानवीयताइस पत्र में आरोप लगाया कि नगर निगम द्वारा जलेसर रोड पर संचालित एनिमल बर्थ कंट्रोल सेंटर यानी एबीसी सेंटर में जानवरों के साथ अमानवीय और गैनकानूनी व्यवहार किया जा रहा है. 19 मई 2025 को पूर्व केंद्रीय मंत्री व पीएफए संस्थापक मेनका गांधी द्वारा एबीसी की अमानवीयता पर नगर निगम के पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. अजय सिंह से संवाद किया गया था जिसमें उन्होंने पारदर्शी मॉनिटरिंग कमेटी बनाने की सिफारिश की थी लेकिन डॉ. अजय सिंह ने इसे मानने से मना कर दिया. आरोप है कि डॉ. अजय सिंह द्वारा बार—बार फीडर्स को धमकी दी जाती है कि यदि उन्होंने आवाज उठाई तो एफआईआर दर्ज करवा दी जाएगी. इसके अलावा उन्होंने एबीसी सेंटर को वीवीआईपी क्षेत्र घोषित कर दिया है जिससे फीडर्स को डॉग्स से मिलने नहीं दिया जा रहा. यह एबीसी गाइडलांइस का उल्लंघन है. उन्होंने पत्र में मांग की है कि एबीसी 2023 के सभी दिशा निर्देशों का पूर्ण पालन सुनिश्चित किया जाए. फीडर्स को शेल्टर में प्रवेश व अपने डॉग्स से मिलने की अनुमति दी जाए. शेल्टर का संचान किसी प्रमाणित संस्था को दिया जाए. इसके अलावा उन्होंने डॉ. अजय सिंह एवं अन्य जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही की मांग की है. पत्र के साथ कई साक्ष्य भी देने का दावा किया है.
गायब हो रहे स्ट्रीट डॉग्स
पत्र में कहा गया कि अर्जुन नगर और खेरिया मोड से हर महीने तीन बार स्ट्रीट डॉग्स को उठाकर बिना किसी रिकार्ड या प्रमाण के गायब कर दिया जाता है, जबकि ऐसा कोई प्रोटोकॉल नहीं है कि किसी वीवीआईपी मूवमेंट के कारण डॉग्स को उनके स्थान से हटा दिया जाए.
पत्र में पुरुषोत्तम बाग, दयाबाग, संजय प्लेस से डॉग्स को बिना टैगिंग के पकड़े जाने का भी जिक्र किया गया है. उनहोंने मांग की है कि जलेसर रोड पर संचालित एबीसी सेंटर को तत्काल बंद किया जाए और एक जून 2025 व अन्य तिथियों को उठाए गए सभी डॉग्स को उनके क्षेत्रों में वापस छोड़ा जाए.