आगरालीक्स…आगरा का घरेलू जूता उद्योग जीएसटी 5 से 12 प्रतिशत बढ़ने से हो रहा प्रभावित. कारोबारी परेशान, बोले—बार-बार हो रहे जीएसटी सर्वे भी पैदा कर रहे भय. एडिशन कमिश्नर जीएसटी (ग्रेड 1) से मिले कारोबारी
द आगरा शू फैक्टर्स फेडरेशन द्वारा बुधवार को एडिशनल कमिश्नर, जीएसटी (ग्रेड 1) पंकज गांधी से जीएसटी कार्यालय पर मुलाकात की गई और जीएसटी व्यवस्था में व्यापारियों को आ रही समस्याओं के बारे में अवगत कराया.निर्दोष विक्रेता पर दंड का आरोप:
यदि कोई दुकानदार A कर का भुगतान कर देता है, लेकिन B द्वारा आगे बिक्री के बाद C कर का भुगतान नहीं करता, तो A को दंड और ब्याज सहित दंडित किया जाता है। यह व्यवस्था व्यापारियों के लिए असंगत एवं अन्यायपूर्ण है, क्योंकि A का इसमें कोई दोष नहीं है।
- जीएसटी नंबर के दुरुपयोग की घटनाएँ:
कुछ असामाजिक तत्व व्यापारियों के जीएसटी नंबर का अनुचित प्रयोग करके उनके नाम से बिल बनाकर माल भेज रहे हैं। इसके कारण निर्दोष व्यापारी को विभागीय जांच और उत्पीड़न का सामना करना पड़ता है, जबकि वह स्वयं इस जानकारी से अनभिज्ञ होता है। - जीएसटी दर वृद्धि से घरेलू जूता उद्योग प्रभावित:
आगरा का जूता उद्योग पहले ही संकट के दौर से गुजर रहा है। जीएसटी दर को 5% से बढ़ाकर 12% किए जाने से यह संकट और गहरा हो गया है। जबकि उत्तरप्रदेश सरकार की ODOP योजना में आगरा के जूते को शामिल किया गया है, इसके बावजूद जीएसटी की यह दर व्यापार वृद्धि में बाधा बन रही है, और अन्य राज्यों की तुलना में आगरा का व्यापार प्रभावित हो रहा है। - बार-बार हो रहे सर्वे से व्यापारियों में भय का माहौल:
लगातार हो रहे जीएसटी सर्वे से व्यापारियों में भय और नकारात्मकता का वातावरण बन रहा है। यदि सर्वेक्षण प्रक्रिया में फेडरेशन के पदाधिकारियों को सम्मिलित किया जाए तो इस प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहेगी और व्यापारियों का विभाग पर विश्वास बढ़ेगा।