आगरालीक्स…आगरा के लैदर फुटवियर निर्यात पर मंदी. 70 करोड़ की रिकॉर्ड कमी. पिछले दो महीने से यूरोप से नहीं मिल रहे आर्डर, कारोबारी वैकल्पिक बाजार की तलाश में
आगरा से लैदर फुटवियर का 80 फीसदी माल यूरोप में सप्लाई होता है. इसमें भी सबसे ज्यादा जर्मनी, फ्रांस, यूके, इटली, नीदरलैंड, पोलैंड में फुटवियर की सबसे ज्यादा सप्लाई की जाती है. मगर, पिछले कुछ समय से यूरोप में चल रही अशांति, यूक्रेन और रूस का युद्ध खत्म न होने के कारण हालत बिगड़ रहे हैं जिसका सबसे ज्यादा असर जूता निर्यातकों पर पड़ रहा है.
मार्च 2024 में 15 फीसदी निर्यात में कमी
आगरा के फुटवियर सहित अन्य लैदर के सामान के निर्यात में सबसे ज्यादा गिरावट इसी वर्ष मार्च में दर्ज की गई है. पिछले साल की तुलना में इस साल मार्च में 15 फीसदी तक निर्यात में कमी आई है. जबकि, मार्च से लेकर जून तक आगरा के जूता निर्यातकों को 60 फीसदी आर्डर मिल जाते हैं जिसके कारण फैक्ट्रियों में रात—दिन काम कराना पड़ता है. मगर इस बार हालात बदले हुए हैं. यूरोप से आर्डर में मिलने में आ रही समस्या के कारण फैक्ट्रियां पूरी क्षमता से नहीं चल पा रही हैं. इस कारण से फैक्ट्रियों में काम करने वाले कर्मचारी भी परेशान हैं.
रेट और जहाजों के संचालन की सुरक्षा से भी घटा निर्यात
जूते के उत्पादन की लागत लगातार बढ़ रही है जबकि वैश्विक बाजार में कॉम्पटीशन इतना बढ़ गया है कि पुरानी दरों पर ही आर्डर दिए जा रहे हैं. सरकार द्वारा जूता इकाइयों को दी जाने वाली प्रोत्साहन राशि में भी कमी आई है. इससे भी आर्डर मिलने में समस्या आ रही है. वहीं एक बड़ा कारण भारत से यूरोप के लिए पानी के जहाजों से जूतों की सप्लाई की जाती है. पिछले कुछ समय से पानी के जहाजों की लूट की घटनाएं बढ़ गई हैं, इससे रूट बदलना पड़ा है. इस कारण से भारत से यूरोप माल सप्लाई करने में 10 दिन अतिरिक्त लग रहे हैं. इस कारण से भाड़ा भी बढ़ गया है.
वैकल्पिक बाजार की तलाश
चर्म निर्यात परिषद के अध्यक्ष आरके जालान का मीडिया से कहना है कि लैदर फुटवियर के निर्यात के वैकल्पिक बाजार के तलाश के साथ ही सरकार से भी समन्वय बनाने का प्रयास किया जा रहा है. उम्मीद है कि अगले महीने से हालात सुधरेंगे परंतु जब तक युद्ध खत्म नहीं होता, तब तक संकट बरकरार रह सकता है.
निर्यात में 70 करोड़ की कमी
आगरा से वित्तीय वर्ष 2022—23 में 3540 करोड़ रुपये का निर्यात हुआ था. जो वित्तीय वर्ष 2023—24 में 3470 करोड़ हुआ है. इस तरह पिछले साल की तुलना में निर्यात में 70 करोड़ की कमी आई है.