आगरालीक्स…13 साल की लड़की को छह साल से हो रही थी खून की उल्टी. एसएन में जांच की गई तो पता लगी ये दुर्लभ बीमारी. एसएन के इन डाॅक्टरों ने पहली सफल शंट सर्जरी कर बचाई जान…
13 साल की एक लड़की 6 साल से खून की उल्टी, प्लीहा बढ़ने (स्प्लेनोमेगाली/ हाइपरस्प्लेनिज़्म) जल्दी तृप्ति और विकास मंदता के कई लक्षणों से पीड़ित थी। उन्होंने गैस्ट्रोसर्जरी ओपीडी एसएनएमसी आगरा में परामर्श लिया। उचित जांच एवं मूल्यांकन के बाद पता चला कि उसे एक्स्ट्रा हेपेटिक पोर्टल वेनस ऑब्स्ट्रक्शन (ईएचपीवीओ) है। सर्जरी के बाद संक्रमण से बचने के लिए सर्जरी से पहले उसे ट्रिपल टीकाकरण न्यूमोकोकल, एच इन्फ्लूएंजा, मेनिंगोकोकल टीका लगाया गया था। मरीज़ ऑपरेशन से पूर्व प्लेटलेट व खून की कमी से भी जूझ रही थी जिसकी आपूर्ति ऑपरेशन के दौरान खून देकर की गई | उन्हें गैस्ट्रोसर्जरी टीम के डॉ. प्रतीक शाह (सहायक प्रोफेसर), डॉ. विक्रम सिंह सोढ़ा (सहायक प्रोफेसर), डॉ. नीलांशा डॉ. रेनू, डॉ. नरेंद्र (एनेस्थीसिया) द्वारा प्रॉक्सिमल स्प्लेनोरेनल शंट (पीएसआरएस) दिया गया।
इस सर्जरी में बायीं वृक्क शिरा से जुड़ी हुई प्लीहा शिरा सहित प्लीहा को हटाना शामिल है। ऑपरेशन के बाद का कोर्स सफल एवं प्रभावशाली रहा और उसे ऑपरेशन के पांचवें दिन छुट्टी दे दी गई। डिस्चार्ज के समय मरीज और उसके परिवार के सदस्य खुश है। इस तरह की सर्जरी पहली बार एसएनएमसी आगरा में की गई। पहले मरीजों को ऐसी जटिल सर्जरी के लिए दिल्ली जैसे महानगरों में जाना पड़ता था। मेडिकल कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉक्टर प्रशांत गुप्ता ने कहा सुपर स्पेशलिस्ट डॉक्टर द्वारा जटिल सर्जरी सरोजिनी नायडू मेडिकल कॉलेज आगरा में की जा रही है , जिससे आगरा एवं आसपास के मरीज लाभान्वित हो रहे हैं।
एक्स्ट्रा हेपेटिक पोर्टल वेनस ऑब्स्ट्रक्शन (ईएचपीवीओ) रोग में आमतौर पर जीवन के पहले और दूसरे दशक के मरीज शामिल होते हैं। कारण बहुक्रियाशील होते हैं जैसे गर्भनाल की अस्वच्छ देखभाल, जन्म के समय रक्त का आदान-प्रदान, आंत्र संक्रमण, हाइपरकोगुलोपैथी(रक्त जमावट विकार)| मरीज़ आमतौर पर हेमटेमिसिस, प्लीहा बढ़ने (स्प्लेनोमेगाली/ हाइपरस्प्लेनिज़्म), विकास मंदता के आवर्ती के साथ उपस्थित होते हैं।
निदान के तरीके ultrasound abdomen पेट रंग डॉपलर, एंडोस्कोपी हैं। ईएचपीवीओ रोगियों का इलाज विशेषज्ञ गैस्ट्रो सर्जन द्वारा शंट सर्जरी द्वारा किया जाता है।