आगरालीक्स…आगरा के दयालबाग में कल से 75 एकड़ में होगी धान की रोपाई. पूरी तरह से ऑर्गेनिक (जैविक) होगी. आगरा सहित देश—विदेश से सत्संगी इस सेवा में जुटे.
दयालबाग में परम गुरु हुजूर डॉक्टर एमबी लाल साहब महाराज के वार्षिक भंडारे का भक्तिमय आगाज़ बेहद जोश और उमंग के साथ हो चुका है। इस पावन अवसर पर देश-विदेश से श्रद्धालुओं का दयालबाग आगमन शुरू हो गया है, जो खेतों में सेवा कार्य कर अपनी अगाध श्रद्धा अर्पित कर रहे हैं। इसी कड़ी में कृषि और सेवा को बढ़ावा देते हुए कल से दयालबाग के खेतों में एग्रोइकोलॉजी के तहत धान की रोपाई का बड़ा कार्य शुरू होने जा रहा है। इस सीजन में लगभग 75 एकड़ भूमि पर धान की रोपाई की जाएगी, जो पूरी तरह से ऑर्गेनिक (जैविक) होगी। उत्तर अमेरिका और एशिया पैसिफिक सहित देश-विदेश के विभिन्न क्षेत्रों से आए श्रद्धालु इस सेवा कार्य में पूरे उत्साह से जुट गए हैं।मंगलवार दोपहर/शाम की खेतों की शिफ्ट के दौरान जहाँ एक ओर बड़े पैमाने पर कृषि कार्य चल रहा था, वहीं दूसरी ओर पूज्य हुजूर के दया मेहर के निर्देशों के तहत आजकल एग्रीकल्चर field में ही मिल्किंग (दूध दुहने) की विशेष व्यवस्था की जा रही है। खेतों के इसी खुले और प्राकृतिक वातावरण में दयालबाग की गौशाला की पालतू गायों को खेतों के समय मिल्किंग के लिए लाया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य एक लाइव डेमोंस्ट्रेशन और ट्रेनिंग देना है, ताकि दयालबाग के स्थानीय लोग और बाहर से आए श्रद्धालु इस पारंपरिक व वैज्ञानिक डेयरी प्रबंधन की बारीकियों को सीख सकें। आज इस प्रक्रिया में बाहर से (विशेषकर विदेशों से) आए हुए सत्संगियों, दयालबाग के निवासियों और बड़ी संख्या में महिलाओं (लेडीज) ने न केवल इसे देखा, बल्कि उत्साहपूर्वक इसमें पार्टिसिपेट भी किया।
कृषि कार्य और मिल्किंग की इस अनूठी व्यवस्था के बीच इसी दोपहर/शाम की खेतों की शिफ्ट में सेवा और अध्यात्म का एक अनोखा संगम देखने को मिला।

गुरु महाराज प्रोफेसर सत्संगी साहब एवं रानी साहिबा की गरिमामयी उपस्थिति में 'संत सुपर ह्यूमन योजना' के बच्चों द्वारा एक बेहद शानदार और अनुशासित सांस्कृतिक कार्यक्रम की प्रस्तुति दी गई। भारतीय लोक संगीत के रंग में रंगे इन बच्चों ने सुंदर भजनों के माध्यम से समां बांध दिया। बच्चों द्वारा प्रस्तुत की गई पंक्तियां—"सुनो सुनो, अजी सुनो सुनो, परम गुरु डाक्टर लाल साहब ने यूनिवर्सिटी बनवाई थी, 'तमन्ना यही' की राह सबको सुझाई थी…" और "गूँज रहे सारे जग में रत्नांजली के बोल हैं…" विशेष रूप से परम गुरु हुजूर डॉक्टर लाल साहब महाराज के चरणों में श्रद्धापूर्वक अर्पित की गईं, जिसने पूरे माहौल को भक्ति रस से सराबोर कर दिया। इस कार्यक्रम का 'ई-सत्संग कैस्केड' के माध्यम से देश-विदेश की 580 से अधिक शाखाओं में सजीव (लाइव) प्रसारण भी किया गया, जिससे लाखों श्रद्धालु ऑनलाइन और offline माध्यम से जुड़े रहे। परम गुरु हुजूर एमबी लाल साहब जी महाराज का भंडारा रविवार 12 जुलाई को दोपहर के खेतों में किया जाएगा, जिसमें आवश्यक नियमों, सोशल डिस्टेंसिंग और मास्क आदि की अनिवार्यता है। पूरे सत्संग समुदाय में इस समय भारी हर्ष, जोश एवं उमंग का माहौल है।