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Agra News: The auspicious time to apply Tilak on Bhaidooj is from morning. There will also be Rahukaal of one and a half hour in between…#agranews

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आगरालीक्स…भाईदूज पर तिलक करने का शुभ मुहूर्त सुबह से. बीच में डेढ़ घंटे का राहुकाल भी रहेगा. जानें सभी शुभ मुहूर्त और भाईदूज की कथा व महत्व…

पौराणिक महत्व
शास्त्रों के अनुसार भाई को यम द्वितीया भी कहते हैं इस दिन बहनें भाई को तिलक लगाकर उन्हें लंबी उम्र का आशीष देती हैं और इस दिन मृत्यु के देवता यमराज का पूजन किया जाता है ब्रजमंडल में इस दिन बहनें यमुना नदी में खड़े होकर भाईयों को तिलक लगाती हैं। कार्तिक शुक्ल द्वितीया को भाई दूज का पर्व मनाया जाता है। इस वर्ष यह पर्व 15 नबम्वर बुधवार को मनाया जाएगा।

भाई दूज को भ्रातृ द्वितीया भी कहते हैं। इस पर्व का प्रमुख लक्ष्य भाई तथा बहन के पावन संबंध व प्रेमभाव की स्थापना करना है। इस दिन बहनें बेरी पूजन भी करती हैं। इस दिन बहनें भाइयों के स्वस्थ तथा दीर्घायु होने की मंगल कामना करके तिलक लगाती हैं। इस दिन बहनें भाइयों को तेल मलकर गंगा यमुना में स्नान भी कराती हैं। यदि गंगा यमुना में नहीं नहाया जा सके तो भाई को बहन के घर नहाना चाहिए। यदि बहन अपने हाथ से भाई को भोजन कराये तो भाई की उम्र बढ़ती है और जीवन के कष्ट दूर होते हैं। इस दिन बहनें अपने भाइयों को चावल खिलाएं। इस दिन बहन के घर भोजन करने का विशेष महत्व है। बहन चचेरी अथवा ममेरी कोई भी हो सकती है। यदि कोई बहन न हो तो गाय, नदी आदि स्त्रीत्व पदार्थ का ध्यान करके अथवा उसके समीप बैठ कर भोजन कर लेना भी शुभ माना जाता है। इस पूजा में भाई की हथेली पर बहनें चावल का घोल भी लगाती हैं उसके ऊपर सिन्दूर लगाकर कद्दू के फूल, पान, सुपारी मुद्रा आदि हाथों पर रखकर धीरे धीरे पानी हाथों पर छोड़ते हुए निम्न मंत्र बोलती हैं।

गंगा पूजे यमुना को यमी पूजे यमराज को, सुभद्रा पूजा कृष्ण को, गंगा यमुना नीर बहे मेरे भाई की आयु बढ़े”
इसी प्रकार इस मंत्र के साथ हथेली की पूजा की जाती है

सांप काटे, बाघ काटे, बिच्छू काटे जो काटे सो आज काटे”

इस तरह के शब्द इसलिए कहे जाते हैं क्योंकि ऐसी मान्यता है कि आज के दिन अगर भयंकर पशु काट भी ले तो यमराज के दूत भाई के प्राण नहीं ले जाएंगे। कहीं कहीं इस दिन बहनें भाई के सिर पर तिलक लगाकर उनकी आरती उतारती हैं और फिर हथेली में कलावा बांधती हैं। भाई का मुंह मीठा करने के लिए उन्हें माखन मिस्री खिलाती हैं। संध्या के समय बहनें यमराज के नाम से चौमुख दीया जलाकर घर के बाहर रखती हैं। इस समय ऊपर आसमान में चील उड़ता दिखाई दे तो बहुत ही शुभ माना जाता है। इस सन्दर्भ में मान्यता यह है कि बहनें भाई की आयु के लिए जो दुआ मांग रही हैं उसे यमराज ने कुबूल कर लिया है या चील जाकर यमराज को बहनों का संदेश सुनाएगा।

भैया दूज की कथा
भगवान सूर्य नारायण की पत्नी का नाम छाया था। उनकी कोख से यमराज तथा यमुना का जन्म हुआ था। यमुना यमराज से बड़ा स्नेह करती थी। वह उससे बराबर निवेदन करती कि इष्ट मित्रों सहित उसके घर आकर भोजन करो। अपने कार्य में व्यस्त यमराज बात को टालता रहा। कार्तिक शुक्ला का दिन आया। यमुना ने उस दिन फिर यमराज को भोजन के लिए निमंत्रण देकर, उसे अपने घर आने के लिए वचनबद्ध कर लिया। यमराज ने सोचा कि मैं तो प्राणों को हरने वाला हूं। मुझे कोई भी अपने घर नहीं बुलाना चाहता। बहन जिस सद्भावना से मुझे बुला रही है, उसका पालन करना मेरा धर्म है। बहन के घर आते समय यमराज ने नरक निवास करने वाले जीवों को मुक्त कर दिया। यमराज को अपने घर आया देखकर यमुना की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। उसने स्नान कर पूजन करके व्यंजन परोसकर भोजन कराया। यमुना द्वारा किए गए आतिथ्य से यमराज ने प्रसन्न होकर बहन को वर मांगने का आदेश दिया। यमुना ने कहा कि भद्र! आप प्रति वर्ष इसी दिन मेरे घर आया करो। मेरी तरह जो बहन इस दिन अपने भाई को आदर सत्कार करके टीका करे, उसे तुम्हारा भय न रहे। यमराज ने तथास्तु कहकर यमुना को अमूल्य वस्त्राभूषण देकर यमलोक की राह की। इसी दिन से पर्व की परम्परा बनी। ऐसी मान्यता है कि जो आतिथ्य स्वीकार करते हैं, उन्हें यम का भय नहीं रहता। इसीलिए भैयादूज को यमराज तथा यमुना का पूजन किया जाता है।

भाई दूज तिलक मुहूर्त
भाई दूज पर भाई को तिलक करने के लिये राहुकाल के समय को अशुभ माना जाता है। जो दोपहर 12:00 बजे से 1:30 बजे के बीच रहेगा
15 नबम्वर बुद्धवार के दिन वृश्चिक राशि का चंद्रमा साथ ही बुध और मंगल का त्रिग्रही योग बन रहा है , दैत्यगुरू शुक्र केतु के साथ कन्या राशि में नीचे के हैं शनि स्वग्रही कुंभ राशि में चल रहे होंगे गुरु मेष राशि में रहेंगे ,तुला की संक्रांति भी इस समय चल रही होगी इस दिन राहू-काल दोपहर 12:00 बजे से दोपहर 01:30 बजे तक रहेगा। यह इस दिन का सबसे नेष्ट और खराब समय माना जाएगा इस समय मे भाई-दूज नहीं मनाना चाहिये।

भाई-दूज तिलक मुहूर्त:
प्रातः काल 6:45 से सुबह 9:45 के बीच दो अत्यंत शुभ मुहूर्त लाभ और अमृत के उपस्थित रहेंगे जिसमें माताएं बहने अपने भाइयों के टीका कर सकती हैं इसके पश्चात दवा कल 11:15 से 11:45 के बीच शुभ का एक और अत्यंत शुभ मुहूर्त उपस्थित होगा जिसमें बहने अपने भाई के टीका कर सकती हैं और उसके बाद दोपहर 1:30 से सांय 5:10 के बीच तीन बहुत सुंदर मुहूर्त आ रहे हैं जो उद्देग चर और लाभ के रहेंगे इसमें माताएं बहने अपने भाई के माथे पर टीका कर सकती हैं यह तीन मुहूर्त इस पूरे दिन के अत्यंत शुभ मुहूर्त रहेंगे

प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य परम पूज्य गुरुदेव पंडित हृदय रंजन शर्मा अध्यक्ष श्री गुरु ज्योतिष शोध संस्थान गुरु रत्न भण्डार पुरानी कोतवाली सर्राफा बाजार अलीगढ़ यूपी व्हाट्सएप नंबर-9756402981,7500048250

Written by
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