आगरालीक्स…हनुमान सम नहीं बड़बागी, नहीं कोऊ चरण अनुरागी…आगरा के पीएस गार्डन में चल रही श्रीराम कथा में सुनाई वीर हनुमान की भक्ति की कथा.
लंका की तीन ताकतें थी। सति सुलोचना के पतिव्रत की तपस्या, संत विभिषण का भजन और वीर इंद्रजीत की ताकत। सामान्य माहौल में पतिव्रत धर्म और भजन तो सब करते हैं, परन्तु दुष्ट और राक्षसों के बीच रहकर पतिव्रत धर्म और भजन करना बहुत बड़ी विशेषता है। सिन्दूर और मंगलसूत्र साधारण नहीं मागंलिक आभूषण हैं, जिनकी बड़ी महिमा है। जो काम भारत की नारियों ने किया वो किसी और ने नहीं किया। पश्चिमी देश की नारी पढ़लिख कर भले ही योग्य हो गई हो, चांद पर पहुंच गई। परन्तु सावित्री के रूप में पतिव्रत धर्म से भारतीय नारी यमलोक तक पहुंची है। इसलिए भारतीय महिलाएं पीछे नहीं आगे बढ़े।
श्रीराम कथा में व्यास पीठ पर विराजमान श्री कामदगिरि पीठाधीश्वर श्रीमद् जगतगुरु राम नंदाचार्य स्वामी रामस्वरूपाचार्य महाराज कहा आज कथा विश्राम के साथ वीर हनुमान की भक्ति की कथा सुनाई।
हनुमान जी के लंका दहन की कथा की व्याख्या करते हुए कहा लंका में रहते हुए 14 महीने तक सीता जी ने श्रंगार नहीं किया। पति की उपस्थिति में ही श्रंगार किया जाना चाहिए। पति को रिझाने के लिए श्रंगार होता है, ससार को रिझाने के लिए नहीं। पाश्चात्य सभ्यता भारत की नारियों को प्रभावित कर रही है। कटिंग, सेटिंग कर रही हैं महिलाएं। सिंदूर मण्डप के नीचे मस्तक के मध्य भाग में लगाया जाता है। आजकल सिंन्दूर ने मस्तक पर साइड से हो गया है। गृहस्थ जीवन में हानि लाभ चलता रहता है। इससे उदास न हुआ करो। जीवन-मरण, लाभ-हानि, यश-अपयश सब ईश्वर के हाथ में है। सिर्फ ईश्वर पर विश्वास रखें। नर हो न निराश करो मन को। आशावादी बनों। तुलसी की तरह पत्नी चाहते हो पुरुषों को भी शालिगराम बनना होगा। मर्यादा का पालन दोनों को करना होगा।