आगरालीक्स…आगरा में विवि के छात्रों ने सीखी मूर्तिकला की बारीकियां. देश के प्रमुख कलाकारों ने दिया प्रशिक्षण.
ललित कला संस्थान में आयोजित छह दिवसीय मूर्ति कला कार्यशाला का आज समापन हुआ. इस अवसर पर बोलते हुए कलाकार चंद्र जी ने ललित कला संस्थान को भी देश के श्रेष्ठ कला संस्थानों में शामिल होने की बात कही, कहा कि ललित कला संस्थान आगरा भी अब बड़े आर्ट कॉलेज की गिनती में शामिल हो गया है। कार्यशाला के इस अवसर पर सभी अतिथि कलाकारों ने अपने वक्तव्य में विश्वविद्यालय की कुलपति की खूब प्रशंसा की तथा कहा कि उनके निर्देशन व निदेशक के नेतृत्व में सभी शिक्षकों की मेहनत का नतीजा है कि ललित कला संस्थान आगरा भी अब देश के श्रेष्ठ कला संस्थानों की श्रेणी में शामिल हो गया है।
कार्यक्रम में सभी अतिथियों का स्वागत सम्मान किया गया. छात्रों ने बोलते हुए बहुत कुछ सीखने की बात कही, मोटिवेशन मिला ऐसे कलाकारों के बीच में रहकर के हमें उन्हें समझाने का तथा कल के माध्यम से उनकी कृतियों को देखने का अवसर प्राप्त हुआ जो हमारे लिए अविष्करणीय पल हैं। कार्यक्रम का संचालन डॉ शीतल शर्मा ने किया। उन्होंने “अतिथि देवो भव” की परंपरा की बात करते हुए कार्यशाला में आमंत्रित कलाकारों का स्वागत किया। उन्होंने ललित कला संस्थान के 25 वर्ष पूरे होने की बधाई दी।
BHU से आए डॉ अमरेश कुमार ने संस्थान के infrastructure को सराहा और आगे भी ऐसे ही कैम्प करने की और देश विदेश में इसकी ख्याति फैलाने की बात की। फ्रीलान्स कलाकार चंद्र प्रकाश ने अपने कैम्प के काम के बारे में बताया कि ये काम डॉ भीमराव अम्बेडकर को समर्पित है और इसमें अलग अलग भाषा में “knowledge “ लिखा है। अगली फ्रीलान्स कलाकार मिसेज़ सोनू अग्रवाल ने सभी को वर्कशॉप पूरा होने की बधाई दी। उन्होंने सभी विद्यार्थियों के योगदान को सराहा। एम एस यूनिवर्सिटी, बड़ौदा से आए मिस्टर अजय कंवल ने विद्यार्थियों को एक्सपेरिमेंटल आर्ट करने की सलाह दी।
इसके बाद इस मूर्तिकला कैम्प के संयोजक डॉ गणेश कुशवाहा ने कहा कि इस कैम्प ने विद्यार्थियों के भीतर एक नई ऊर्जा का संचार किया। उन्होंने ये भी कहा इस कैम्प में आए समकालीन कलाकारों के शब्दों और विचारों ने विद्यार्थियों के भीतर जो बीज बोया है वो आगे जाकर बड़े बड़े पेड़ों के रूप में विकसित होंगे। कार्यक्रम के अंत में कार्यशाला के सह संरक्षक डॉ मनोज कुमार ने सभी आमंत्रित कलाकारों, प्रतिभागियों , वॉलंटियरों एवं पूरे संस्थान के हरेक विद्यार्थी के सहयोगपूर्वक काम करने को सराहा। इस अवसर पर संस्थान के शिक्षकगण – डॉ. शार्दूल मिश्रा, दीपक कुलश्रेष्ठ, देवेंद्र कुमार सिंह, डॉ. शीतल शर्मा, पारुल जुरैल, महिमा सिंह, डॉ ममता बंसल, कुसुम यादव, नीरज आदि का सहयोग सराहनीय रहा।