आगरालीक्स…आगरा में फूड प्रोसेसिंग क्षेत्र की असीम संभावनाएं…क्वालिटी प्रोडक्ट और ग्राहक की मांग को समझना होगा…खाद्य सुरक्षा की नये नियमों को लेकर उद्यमी एवं व्यापारियों को होना होगा जागरूक
एमजी रोड स्थित होटल होलीडे इन में चेंबर ऑफ फूड प्रोसेसिंग इंडस्टरीज एसोसिएशन द्वारा फूड सेफ्टी अवेयरनेस वर्कशॉप का आयोजन किया गया. कार्यक्रम के दौरान नये सदस्यों को प्रमाण पत्र वितरित किए गए. शुभारंभ चेंबर के अध्यक्ष राजकुमार भगत, महासचिव अनुज सिंघल, उपाध्यक्ष आशीष गर्ग, सचिव विकास चतुर्वेदी, शैलेश अग्रवाल, सिद्धार्थ अग्रवाल एवं विशिष्ट अतिथि के रूप में खाद्य सुरक्षा विभाग के आगरा जोन 3 और 4 के प्रभारी अजय कुमार, खाद्य सुरक्षा अधिकारी चंद्र विजय सिंह, सुरेंद्र चौरसिया ने दीप प्रज्जवलन कर किया.कार्यक्रम को संबोधित करते हुए चेंबर के सचिव विकास चतुर्वेदी ने कहा कि आगरा में फूड प्रोसेसिंग क्षेत्र की असीम संभावनाएं हैं हमें क्वालिटी प्रोडक्ट और ग्राहक की मांग को समझना होगा. चेंबर की उपाध्यक्ष आशीष गर्ग ने कहा कि फूड प्रोसेसिंग कैपिटल के रूप में आगरा डेवलप हो रहा है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में जाने के लिए कंप्लायंस को पूरा करना होगा और प्रोडक्ट की सेल्फ ऑडिट हमें आगे ले जा सकती है.
सचिव सिद्धार्थ अग्रवाल ने कहा कि रसोई मसाले के क्षेत्र में आगरा तेजी से विस्तार कर रहा है. पैकेजिंग और ब्रांडिंग किसी भी उत्पाद का पहला आकर्षण होता है हमेशा आकर्षण को और आकर्षित बनाने की आवश्यकता है.

व्यापारियों को संबोधित करते हुए खाद्य सुरक्षा अधिकारी अजय कुमार ने कहा कि खाद्य प्रसंस्करण के दौरान प्रयोग होने वाली खाद्य कलरों के अनुपात का सही ज्ञान होना चाहिए और खाद्य कलर मिलाने के दौरान उसकी मात्रा की अधिकता स्वास्थ्य के लिए हानिकारक रहती है. ऐसी स्थिति में खाद्य कलरों से भी बचने की आवश्यकता है. प्रमुख रूप से कहा कि FSSAI ने 1 अप्रैल 2026 से यूपी सहित पूरे देश में खाद्य लाइसेंसिंग नियमों को सरल बना दिया है. नए नियमों के तहत लाइसेंस/रजिस्ट्रेशन अब हमेशा के लिए मान्य (Perpetual Validity) होंगे और बार-बार रिन्यूअल की जरूरत नहीं होगी. रजिस्ट्रेशन के लिए टर्नओवर सीमा ₹12 लाख से बढ़ाकर ₹1.5 करोड़ कर दी गई है और नगर निगम पंजीकृत स्ट्रीट वेंडर्स को अलग से रजिस्ट्रेशन की आवश्यकता नहीं होगी.
FSSAI के नए नियम (1 अप्रैल 2026 से प्रभावी):लाइफटाइम वैलिडिटी: अब फूड लाइसेंस और रजिस्ट्रेशन को बार-बार रिन्यू (Renew) कराने की जरूरत नहीं होगी, यह हमेशा के लिए मान्य रहेंगे।
टर्नओवर लिमिट में वृद्धि: अब ₹1.5 करोड़ तक का टर्नओवर करने वाले छोटे व्यवसायों के लिए सिर्फ 'बेसिक रजिस्ट्रेशन' ही काफी होगा।
स्टेट लाइसेंस की सीमा: ₹50 करोड़ तक के टर्नओवर वाले व्यवसायों के लिए अब स्टेट लाइसेंस की आवश्यकता होगी।
स्ट्रीट वेंडर्स के लिए राहत: नगर निगम में पंजीकृत स्ट्रीट वेंडर्स को अलग से FSSAI लाइसेंस लेने की जरूरत नहीं है; वे स्वचालित रूप से पंजीकृत माने जाएंगे।
केंद्रीय लाइसेंस: ₹50 करोड़ से अधिक का टर्नओवर वाले व्यवसायों पर सेंट्रल लाइसेंसिंग के नियम लागू होंगे।
अपने उद्बोधन में चंद्र विजय सिंह खाद्य सुरक्षा अधिकारी ने कहा कि नई नियमों का उद्देश्य: इन बदलावों का उद्देश्य खाद्य सुरक्षा नियमों की निगरानी को प्रभावी बनाना और छोटे व्यापारियों के लिए 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' को बढ़ावा देना है. यह बदलाव 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी रूप से लागू होंगे. कार्यक्रम के दौरान अध्यक्ष उद्बोधन में राजकुमार भगत ने कहा कि विभाग को समय-समय पर व्यापारियों और उद्यमियों को खाद्य सुरक्षा मानकों के नए नियमों की जानकारी और उनके नियम की जागरूकता के लिए विभाग को कार्यशालाओं का आयोजन करना चाहिए ताकि उद्यमी खाद्य सुरक्षा को लेकर और तकनीकी रूप से कार्य कर सके. कार्यक्रम में उपस्थित उद्यमी और व्यापारियों ने विभागीय अधिकारियों से कहा कि टेस्टिंग लैब से जो रिपोर्ट मिलती है वह रिपोर्ट काफी समय लगाती है. कभी-कभी तो दो-तीन महीने तक लगते हैं अगर टेस्टिंग की रिपोर्ट ज्यादा से ज्यादा एक हफ्ते में मिल जाए तो उत्पाद की गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखा जा सकता है.
नए सदस्यों को सदस्यता के प्रमाण पत्र दिए दिए गए जिसमें प्रमुखता से मौजूद थे संदीप कयला, अमित गर्ग, शिवम जैन, अजय गुप्ता, संत प्रसाद सारस्वत, राहुल अग्रवाल, दीपक गुप्ता, सौरभ कुमार गुप्ता, संजय शर्मा, योगेश कुशवाहा, संजीव अग्रवाल अक्षत बंसल आदि रहे. कार्यक्रम का संचालन संस्था के मुख्य सलाहकार मनीष अग्रवाल रावी द्वारा किया गया. धन्यवाद ज्ञापन चैंबर महासचिव अनुज सिंघल द्वारा किया गया. कार्यक्रम की व्यवस्थाएं एडमिनिस्ट्रेटर अपरार्क शर्मा, दिलीप कुमार, अनिल सविता द्वारा संभाली गई.