आगरालीक्स …आगरा में ब्रिटिश के नामचीन लेखन के मनोरोग को डॉक्टरों ने ठीक कर दिया लेकिन जान नहीं बचा पाए। पर्यटन पुलिस ने मिसाल पेश की, ब्रिटिश नागरिक की अंतिम यात्रा निकाली और अंतिम संस्कार भी कराया।

मूलरूप से सूरत गुजरात के रहने वाले श्याम जिन्डरिच बटूक मेहता लंदन में रह रहे थे, 70 साल के श्याम लेखक के साथ ही योग पर काम कर रहे थे, वे इसी वर्ष ऋषिकेश आए थे। यहां से फरवरी में वे लखनऊ के लिए निकले, बिजनौर से गायब हो गए। कावड़ यात्रा के साथ चलते हुए बिचपुरी आ गए। बिचपुरी से उन्हें पर्यटन थाना भेजा गया, कई घंटे तक उनसे बात की गई, वे गुस्से में थे। 25 फरवरी को उन्हें मानसिक स्वास्थ्य संस्थान एवं चिकित्सालय में भर्ती कराया गया। उनका सिजोफ्रेनिया का इलाज चला, इस बीमारी में कान में आवाज आती है। शक होने लगता है। जून में तबीयत ठीक हो गई। ब्रिटिश एंबेसी से संपर्क किया गया जिससे उन्हें लंदन भेजा जा सके। उनके पासपोर्ट की अवधि भी समाप्त हो गई थी। 22 जुलाई को तबीयत बिगड़ने पर एसएन में भर्ती कराया गया। यहां 24 जुलाई को इलाज के दौरान मौत हो गई। पर्यटन पुलिस ने एंबेसी के माध्यम से उनकी पत्नी इंद्रा मेहता से लंदन में संपर्क किया। उन्होंने सूरत में रहने वाले परिचित रवि पटनायक को अंतिम संस्कार कराने के लिए नामित किया। वे आगरा आए, पर्यटन पुलिस ने पोस्टमार्टम कराने के बाद उनकी मौजूदगी में अंतिम यात्रा निकाली गई और अंतिम संस्कार कराया। श्याम जिन्डरिच बटूक मेहता मूल रूप से सूरत गुजरात के रहने वाले थे। श्याम जिन्डरिच बटूक मेहता को भर्ती कराने से लेकर इलाज में पर्यटन पुलिस ने मदद की। मौत होने के बाद भी आगे की कार्रवाई पर्यटन पुलिस द्वारा की गई। पर्यटन थाने में पहला पंचनामा भरा गया।
किताबें लिखने के साथ योग पर शोध
श्याम जिन्डरिच बटूक मेहता ने 50 से ज्यादा किताबें हैं, योग पर काम कर रहे थे और कई किताबें लिख चुके थे। योग पर और काम करने के लिए ही वे ऋषिकेश आए थे। उनकी मां ने भी योग पर काफी काम किया था। वे काफी समय से अपनी पत्नी इंद्रा मेहता से अलग रह रहे थे।