आगरालीक्स..(वीडियो देखें), आगरा में होटल से चल रहा था साइबर क्राइम. लोगों के एकाउंट से करते थे रकम पार. 8 अपराधी पकड़े. दुबई से सीखा साइबर फ्रॉड का काम…42 एटीएम, 11 चेक बुक मिलीं
आगरा की साइबर सेल, सर्विलांस, साइबर काउंटर इंटेजिलेंस व थाना ताजगंज पुलिस को बड़ी सफलता हाथ लगी है. टीम ने एक होटल के अंदर से चल रहा साइबर अपराध का बड़ा नेटवर्क पकड़ा है. पुलिस ने इस गिरोह में शामिल 8 लोगों को अरेस्ट किया है. इनके पास से 42 एटीएम, 11 चैक बुक, 9 मोबाइल फोन, कुल रु0 3,412/- भारतीय मुद्रा व रु0 215/- नेपाली मुद्रा बरामद की है. इसके अलावा एक कार भी मिली है.पकड़े गए शातिरों के नाम
रनवीर भार्गव पुत्र अनिल भार्गव निवासी कैलाश पुरी पालम गांव दक्षिण पश्चिमी दिल्ली।
सौरभ चौधरी पुत्र गुलवीर सिंह निवासी नागल खुर्द जनपद अलीगढ़।
अनुज पुत्र आनंद स्वरूप निवासी 305 भगत कतरा जनपद ओरिया।
राहुल कुमार पुत्र विपिन कुमार तारा निवासी कावेरी कुंज आगरा।
देवेंद्र प्रताप सिंह पुत्र स्व0 कलिका प्रताप सिंह निवासी सर्वोदय नगर अल्लापुर, प्रयागराज।
अजय कुमार पुत्र हरिलाल निवासी प्रताप नगर, थाना जगदीशपुरा आगरा।
ध्रुवनाथ प्रताप सिंह पुत्र अमरपाल सिंह निवासी बल्लीपुर थाना गला खंगार, जनपद फिरोजाबाद।
चिरंजीवी शर्मा पुत्र राकेश शर्मा निवासी फुलट्टी बाजार, थाना एमएमगेट आगरा।
पुलिस टीम द्वारा पूछताछ करने अभियुक्तगण ने बताया कि वह साइबर फ्रॉड का काम करते हैं व उसके फोन में कुछ एप है जिनसे फ्रॉड का पैसा खातों में आता है तथा उस अकाउन्ट को मैनेज करने का काम वह करते है। उनका सारा काम उनके फोन में मौजूद एप से चलता है और वह सब व्हॉटसएप से जुडे है। वह साइबर क्राइम के लिए एक ऐसे खाते का उपयोग करते थे, जिसकी लिमिट लाखों-करोडों में हो।

होटल में मिलते थे सभी
खातों का इंतजाम होने के बाद वह लोगों अक्सर अलग-अलग जगह पर हॉटलों में साइबर फॉड करने हेतु एक जगह एकत्र हुआ करते है। उनके कुछ साथी निर्धारित जगह के आस-पास ही वाहनों में बैठ कर, एप के माध्यम से उनके साथ शामिल होते है। अभियुक्त रनवीर ने बताया कि वह साइबर अपराध करने में मध्यस्थता का काम करता है। वह खातों की व्यवस्था का काम करता है व उन खाता धारकों को एप कन्ट्रोल करने वालों से मिलाता है। उसे अपने काम के सम्बन्ध में भीलवाडा के एक व्यक्ति को अपडेट देनी होती है जो उसको 2% कमीशन दिया करता है। वह हम सबको कन्ट्रोल व मैनेज करने का काम करता है। वह सिर्फ अभियुक्त रनवीर के माध्यम से इनको मैनेज करता है। अभियुक्त देवेन्द्र ने बताया कि वह बहुत सालों से ये काम कर रहा है तथा वह यह काम दुबई से सीख के आया था और भारत में आकर उसने यह दिल्ली से शुरू किया। भीलवाडा वाला व्यक्ति ऊपर से सब कुछ मैनेज करता है। उपरोक्त वांछित अभियुक्तगण लोगों के खातों को धोखाधड़ी से खुला लेते है फिर चालू खातों में उनकी सिम लगा कर पूरी किट ले लेते है । खातों की किट को गिरफ्तार अभियुक्तगण आगे अपने साथियों को दे देते है । उपरोक्त खातों में करोडों का फ्रॉड करके, खाते के फ्रिज हो जाने पर उसको बन्द कर देते है।