आगरालीक्स…आगरा में आपने सावन की मिठाई अनरसे, क्या आपने खाए हैं? मीठे कुरकुरे अनरसे के स्वाद के आप भी हो जाएंगे दीवाने। दुकानों पर बनने लगे कम। घर में भी बना सकते।

उत्तर भारत खासकर राजस्थान की पसंदीदा मिठाई
आगरा में सावन के महीने में घेवर तो हर मिष्ठान विक्रेता की दुकान पर तरह-तरह का मिल जाएगा लेकिन अनरसे (इनरसे) बहुत कम दुकानों पर मिलेंगे। उत्तर भारत खासकर राजस्थान में इस मिठाई का खासा क्रेज है।
कीमत में कम और स्वाद में बेमिसाल

आगरा में काफी ढूंढने पर फुलट्टी बाजार में अशोक मिष्ठान्न की दुकान पर अनरसे बिकते हुए मिले। दुकान पर देशी घी का घेवर और फैनी के साथ अनरसे भी रखे थे। इसके अलावा राजामंडी में ओमी लाला के यहां भी सावन में अनरसे बनते हैं। सदरभट्टी, शाहगंज की कुछ दुकानों पर अनरसे मिल जाएंगे।
चावल और तिल से बनाए जाते
अनरसे चावल और तिल से बनाए जाते हैं। देसी घी अथवा मूंगफली के तेल में सेंका जाता है। इसी के हिसाब से कीमत होती है। दुकानों पर मूंगफली के तेल में सेंके जाने वाले अनरसे 240 रुपये किलो के हिसाब से बिक रहे हैं। शहर कुछ ठेल वाले भी सवान के महीनों में शाम के समय अनरसे बेचते हैं।
अनरसे के शौकीनों की हो गई है कमी
अनरसे की बिक्री कम होने के बारे में इसके खाने के शौकीन लोगों का कहना है कि इसमें मेहनत ज्यादा लगती है और खाने वाले कम हो गये हैं, जिससे दुकानदार भी बनाने से कतराते हैं।
पूर्वांचल में भी खासा क्रेज
पूर्वांचल में अनरसे को लेकर एक कहावत मशहूर है कि- हे भगवान बरसा, हम खाई अनरसा।
इसके बारे में कहा जाता है कि जब बारिश नहीं होती है तो लोग इस कहावत का आज भी इस्तेमाल कर लेते हैं।
अनरसे बनाने का तरीका
तीन दिन तक भिगोकर रखने पड़ते हैं साफ चावल
सबसे पहले अच्छे किस्म के चावल को साफ करने के बाद धोकर तीन दिन तक भिगोकर रख दिया जाता है। इस दौरान हर 24 घंटे के बाद पानी को बदलकर साफ पानी भर दिया जाता है।
तीन दिन बाद फिर सुखाए जाते हैं चावल
तीन दिन बाद एक बार फिर चावलों को धोने के बाद चावलों को सूती कपड़े पर छायादार जगह पर सूखने के लिए ऱख दिया जाता है।
दरदरा पीसने के बाद, बूरा, देसी घी, दही मिलाकर गूंथे
धुले हुए चावलों का पानी सूख जाए और नरम बने रहे तो उसे दरदरा पीस लिया जाता है। इसके बाद बूरा, दही, देशी घी को चावल के आटे में मिलाकर थोड़े पानी की मदद से आटे की तरह गूंथ लिया जाता है।
इस आटे को फिर 12 घंटे तक गीले कपड़े में ढंकर रखें
इसके बाद इस आटे को फिर गीले कपड़े से ढ़कर करीब 12 घंटे तक नरम होने के लिए रख दिया जाता है। इसके बाद अनरसे बनने की प्रक्रिया शुरू होती है।
इस तरह बनाएं कुरकुरे मीठे स्वादिष्ट अनरसे
इसमें आटे की छोटी-छोटी गोलियां की लोई बनाएं, (मूंग की दाल की मंगोड़ी की बराबर ) इन पर तिल लपटें और देसी घी अथवा नारियल के तेल में इसे धीमी आंच पर तलें और सुनहरा रंग होने तक तलते रहें, तो इस तरह तैयार हो जाएंगे आपके कुरकुरे मीठ़े अनरसे।