आगरालीक्स ..आगरा के डॉक्टरों ने बेटी बचाओ बेटी पढाओ में बाजी मारी है। आगरा आब्सटेट्रिकल एंड गायनेकोलाॅजिकल सोसायटी बेटी बचाओ और महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में देश में सबसे अच्छा काम कर रही है। लखनऊ में देश भर से आए स्त्री रोग विशेषज्ञों की मौजूदगी में आगरा सोसायटी को यह खिताब दिया गया है।
29 जनवरी से 02 फरवरी तक लखनऊ के मान्यवर श्री काशीराम जी सांस्कृतिक स्थल, स्मृति उपवन में 63 वीं आॅल इंडिया आॅब्सटेट्रिक्स एंड गायनेकोलाॅजिकल कांग्रेस मे आगरा के डाॅक्टर छाए रहे। एक ओर जहां विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने के लिए स्थानीय डाॅक्टरों को अवाॅर्ड से नवाजा गया तो वहीं देश भर में सेव गर्ल चाइल्ड कैंपेन पर काम करने के लिए आगरा आब्सटेट्रिकल एंड गायनेकोलाॅजिकल सोसायटी को फाॅग्सी-मिलन स्मृति अवाॅर्ड प्रदान किया गया। दूसरे स्थान पर अमरावती और वापी सोसायटी रही। वहीं महिला सशक्तिकरण पर श्रेष्ठ कार्य करने के लिए आगरा कीं डा. निहारिका मल्होत्रा को फाॅग्सी-एनए पंडित एवं शैलजा पंडित वूमेन एंपावरमेंट अवाॅर्ड प्रदान किया गया। साथ ही उन्हें अगले 3 वर्षों के लिए फॉगसी यंग टेलेंट कमेटी की चेयरपर्सन नियुक्त किया गया। डॉ जयदीप मल्होत्रा ने गर्भवती महिलाओं को समर्पित आई मम्ज एप लांच किया। डा. जयदीप मल्होत्रा, डा. नरेंद्र मल्होत्रा और आगरा सोसायटी के अध्यक्ष डा. अनुपम गुप्ता को भी महिला स्वास्थ्य के विभिन्न क्षेत्रों में सर्वश्रेष्ठ कार्य करने के लिए अवाॅर्ड प्रदान किए गए। उन्होंने कई तकनीकी सत्रों, पैनल डिस्कशन्स की अध्यक्षता भी की। युवा एंब्रियोलाॅजिस्ट के रूप में आगरा के डा. केशव मल्होत्रा के शोध पत्रों और एंब्रियो प्रणाली को और अधिक पारदर्शी बनाने के लिए उनके द्वारा किए जा रहे कार्यों को काफी सराहना मिली। आगरा से इस चिकित्सकीय सम्मेलन में डॉ वरुण सरकार, डॉ सरोज सिंह, डॉ शिखा सिंह, डॉ निर्मला यादव, डॉ दिव्या यादव, डॉ पूनम यादव, डॉ रचना, डॉ मुकेश चंद्रा, डॉ रुचिका गर्ग, डॉ निधि गुप्ता, डॉ सुधा बंसल, डॉ सविता त्यागी, डॉ अंजना अरोड़ा समेत लगभग 30 स्त्री रोग विशेषज्ञों ने सहभागिता की। तमाम डाॅक्टरों को उनके सर्वश्रेष्ठ शोधपत्रों के लिए भी सम्मानित किया गया।

इस अवसर पर आयोजन अध्यक्ष डा. चंद्रावती, आयोजन सचिव डा. प्रीति कुमार, फाॅग्सी अध्यक्ष डा. नंदिता पल्सेत्कर, प्रेसीडेंट इलेक्ट फाॅग्सी डा. अल्पेश गांधी, आयोजन सह अध्यक्ष डा. मंजू शुक्ला, आयोजन सह सचिव डा. विनीता दास, साइंटिफिक चेयरपर्सन डा. एचपी गुप्ता, डा. उमा सिंह के साथ ही देश भर से आए विशेषज्ञ मौजूद थे।
महिला स्वास्थ्य को मूल्यांकन और शिक्षा की जरूरतः डा. जयदीप मल्होत्रा
आगरा। स्त्री रोग विशेषज्ञों के इस सबसे बडे़ मंच पर आगरा कीं डा. जयदीप मल्होत्रा ने महिला स्वास्थ्य के मूल्यांकन और शिक्षा के प्रति एक बार फिर झकझोरा। डा. जयदीप ने कहा कि आज जरूरत है सामाजिक स्त्री रोग एवं प्रसूति विज्ञान की, क्योंकि सामाजि और आर्थिक परिस्थितियां स्वास्थ्य, बीमारी और चिकित्सा के अभ्यास पर गहरा प्रभाव डालती हैं। जनसंख्यास नियंत्रण पर भी यह एक सामाजिक चिंतन का विषय है। एक व्यापक और बहुआयामी शिक्षा कार्यक्रम के माध्यम से स्वास्थ्य के सामाजिक निर्धारकों को सामुदायिक स्वास्थ्य, ग्रामीण और शहरी ऐसे अंचलों में जहां अच्छी चिकित्सा सुविधाएं महिलाओं तक नहीं पहुंच पा रही हैं, स्वास्थ्य प्रदाताओं की अगली पीढ़ी को प्रशिक्षित करने का लक्ष्य रखना चाहिए। सरकारों को इसमें निजी क्षेत्र के चिकित्सकों, चिकित्सा विशेषज्ञों की मदद एक योजनाबद्ध तरीके से लेनी चाहिए।
प्रीटर्म बर्थ आज सबसे बड़ी समस्या: डा. नरेंद्र मल्होत्रा
आगरा के ही वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ डा. नरेंद्र मल्होत्रा के प्रीटर्म बर्थ और अल्ट्रासाउंड पर व्याख्यान को काफी सराहा गया। उन्होंने बताया कि समय से पहले जन्म 24 से 36 वें सप्ताह में होता है। प्रीटर्म बर्थ पर ग्लोबल एक्शन रिपोर्ट कहती है कि भारत में तकरीबन 3.500,000 जन्म समयपूर्व होते हैं। यह कुल जन्म का लगभग 24 प्रतिशत है। जैसा कि आंकडे़ बताते हैं भारत दुनिया की समयपूर्व डिलीवरी में 60 प्रतिशत योगदान देने वाले 10 देशों की सूची में सबसे उपर है। अमेरिका में यह दर 12.5 प्रशित है और दुनिया में लगभग 9.4 प्रतिशत। पिछले दस साल से दुनिया भर में प्रीटर्म डिलीवरी की दर लगातार बढ़ रही है और यह स्वास्थ्य चिकित्सा क्षेत्र की नंबर वन समस्या बन गई है। प्रीटर्म डिलीवरी की कोई निश्चित वजह नहीं है, लेकिन इसके प्रमुख कारणों में 18 से कम और 40 वर्ष से अधिक आयु में गर्भावस्था, योनिक्षेत्र के संक्रमण, जुड़वां बच्चे, मां एंटीनेटल के लिए न जाए, मां को किसी तरह की बीमारी होना, धूम्रपान, बच्चेदानी की कोई खराबी, प्लेसेंट की कोई खराबी, बुखार, टायफायड, निमोनिया, यूरिन इनफेक्शन आदि कई हो सकते हैं। स्त्री रोग विशेषज्ञ गर्भवती महिलाओं को गर्भावस्था की अवधि के दौरान नियमित चिकित्सा जांच के लिए जाने का सुझाव देते हैं।