आगरालीक्स….भढली नवमी कल, अबूझ मुहूर्त में होंगी कई शादियां फिर चार महीने करना होगा इंतजार. जानें क्या होता है अबूझ मुहूर्त
भढली नवमी और अबूझ मुहूर्तआषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी यानी कि देवशयनी एकादशी। इस दिन से भगवान श्रीहरि (विष्णु भगवान)योग निद्रा में चले जाते हैं। देवाधिदेव भोलेनाथ इन चार माह के लिए पूरे संसार की जिम्मेदारी को संभालते हैंइसलिए शादी-विवाह बच्चों का मुडंन, नींव पूजन,ग्रह प्रवेश अन्य सभी शुभ कार्यों का आयोजन बंद कर दिया जाता है। इसके बाद जब चातुर्मास बीतने पर कार्तिक शुक्ल एकादशी को भगवान श्रीविष्णु निद्रा से जागते हैं। इस तिथि को प्रबोधिनी एकादशी के नाम से जाना जाता है। इस दिन से शुभ कार्य फिर से शुरू हो जाते हैं। लेकिन बता दें कि देवशयनी एकादशी से दो दिन पूर्व यानी कि आषाढ़ माह की शुक्ल पक्ष की नवमी को भी शुभ कार्य बिना किसी विचार के किये जा सकते हैं। यह दिन अत्यंत ही शुभ होता है। इसे भड्ड़ली, भड़ल्या नवमी या अबूझ विवाह मुहूर्त भी कहते हैं
अबूझ विवाह मुहूर्त तिथि
भढली नवमी को उत्तर भारत में विवाह के लिए अबूझ विवाह मुहूर्त माना जाता है। सनातन धर्म में विवाह के लिए छ अबूझ मुहूर्त बताए गए हैं। भढली नवमी उन्हीं में से एक होती है। इस वर्ष भढली नवमी 22 जुलाई बुधवार को है। यह इस वर्ष का अंतिम अबूझ विवाह मुहूर्त भी है। इसके ठीक तीन दिन बाद 25 जुलाई 2026 को देवशयनी एकादशी है
अबूझ मुहूर्त क्या है
अबूझ विवाह तिथि का अर्थ है कि जिन लोगों के विवाह के लिए कोई मुहूर्त नहीं निकलता उनका विवाह इस दिन किया जाए तो उनके वैवाहिक जीवन में किसी प्रकार का व्यवधान नहीं आता है। कहने का अर्थ है कि बिना किसी चिंता के इन विशेष तिथियों पर मांगलिक कार्य संपन्न किए जाते हैं। यह तिथियां ऐसी होती हैं कि इन पर बिना पंडित की सलाह लिए शुभ काम किए जाते हैं। साथ ही इनमें पंचांग देखने की भी जरूरत नहीं होती है। बिना ज्योतिषी को दिखाए ही मांगलिक कार्य किए जाते हैं। ये दिन स्वयं में सिद्ध होते हैं और अत्यंत शुभ माने जाते हैं
सनातनी कैलेंडर के अनुसार, एक वर्ष में बसंत पंचमी, फुलेरदोज (फाल्गुन पक्ष की शुक्ल पक्ष की द्वितीया), अक्षय तृतीया,रामनवमी, जानकी नवमी, पीपल पूर्णिमा (वैशाख मास की पूर्णिमा), गंगा दशमी (ज्येष्ठ मास की शुक्ल दशमी) भड्डली नवमी (आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की नवमी) अबूझ विवाह मुहूर्त होता है। इस दिन किसी भी विचार की जरूरत नहीं होती है इस जुलाई माह में केवल एक शुभ विवाह मुहूर्त 22,जुलाई भड्ढंली नवमी या भड़रिया नवमी अनबूझा साया रहेगा
20नवंबर शुक्रवार तक नहीं होंगे शुभ कार्य
भढली नवमी के दो दिन बाद देवशयनी एकादशी से चातुर्मास लग जाता है। इसका अर्थ होता है कि भढली नवमी के बाद 4 माह तक विवाह या अन्य शुभ-मांगलिक कार्य नहीं किए जाते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस अवधि में सभी देवी-देवता पाताल लोक में राजा बलि के यहां निद्रा में चले जाते हैं। इसके बाद सीधे देवप्रबोधिनी एकादशी पर विष्णुजी के जागने पर चातुर्मास समाप्त होता है। इसके बाद ही सभी तरह के शुभ कार्य शुरू किए जाते हैं। इस बार प्रबोधिनी एकादशी 01नवंबर को है। यानी कि 06 जुलाई से 01 नवंबर तक सभी शुभ कार्य वर्जित है। ऐसे में जो लोग इस तिथि से पहले विवाह करना चाहते हैं वह अबूझ विवाह मुहूर्त में विवाह कर सकते हैं। अन्यथा विवाह के लिए चार माह के लिए इंतजार करना पड़ेगा
जो 21,24,25,26 नवंबर होगो
इसके बाद दिसंबर माह में01,02,03, 04, 11 ,12,13 दिसंबर वर्ष 2026 के शुभ विवाह मुहूर्त होंगे जिसमें विवाह शादी एवंसभी प्रकार के शुभ कार्य करना उचित माना जाएगा
प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य परम पूज्य गुरुदेव पंडित हृदयरंजन शर्मा अध्यक्ष श्री गुरु ज्योतिष शोध संस्थान गुरु रत्न भंडार पुरानी कोतवाली सर्राफा बाजार अलीगढ़ यूपी व्हाट्सएप नंबर-9756402981,7500048250