आगरालीक्स…चैत्र नवरात्र के चौथे दिन देवी मंदिरों में होगी मां के चौथे स्वरूप कूष्मांडा की पूजा. जानिए मां कुष्मांडा के बारे में
चैत्र शुक्ल पक्ष चतुर्थी दिन मंगलवार को भरणी नक्षत्र, विष्कुम्भ योग, वव करण के शुभ संयोग में 01 अप्रैल 2025 को ही माता कूष्मांडा की पूजा घर घर होगी. चोला( रानी कलर) का शुभरंग (संतरी) भोग खीर और मालपुए का भोग लगाये। ब्राह्मण को दान करने से और खुद भी खाने से बुद्धि का विकास होता है।
मां दुर्गा के चौथे स्वरुप का नाम कूष्मांडा है। अपनी मंद मुस्कान द्वारा ब्रह्मांड को उत्पन्न करने के कारण इन्हें कूष्मांडा देवी के नाम से अभिहित किया गया है। ब्रह्मांड की रचना करने वाली देवी भगवती कुष्मांडा नाम से लोक प्रसिद्ध हुई। इन की क्रांति और आभा सूर्य के समान है। कुष्मांडा देवी ने ही सृष्टि का विस्तार किया। इनका यह स्वरूप देवी अन्नपूर्णा का है। अतः यही सृष्टि के आदि स्वरूपा और आदिशक्ति हैं इनका निवास सूर्यलोक में है। इन्हीं के तेज और प्रकाश से दसों दिशाएं प्रकाशित हो रही हैं।
ये अष्टभुजा देवी के नाम से कभी विख्यात हैं। संस्कृत भाषा में कुष्मांडा कुंम्हड़े को कहते हैं। वलियों में कुम्हडेकी बलि ने सर्वाधिक प्रिय है। प्रकृति और लोगों को भूख प्यास से व्याकुल देखकर मॉ शाकुंभरी का रूप धर शाक से धरती को पल्लवित किया और शताक्षी बनकर असुरों का संहार किया। कुष्मांडा देवी उदर की देवी हैं। यह प्रकृति और पर्यावरण की अधिष्ठात्री है। कुष्मांडा देवी की आराधना के बिना जप और ध्यान संपूर्ण नहीं होते। मां कूष्मांडा की उपासना से भक्तों के समस्त रोग-शोक विनाश हो जाते हैं। मां कूष्मांडा अत्यल्पसेवा और भक्ति से प्रसन्न होने वाली है। नवरात्र के चौथे दिन साग सब्जी और अन्न का दान करने के लिए फलदाई है। माता के इस रुप में तृप्ति और तुष्टि दोनों हैं ,इस दिन साधक का मन अनाहत चक्र में स्थित होता है।
प्राचीन मंत्र-
या देवी सर्वभूतेषु शक्ति रुपेण संस्थिता! “”नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः””*
प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य परमपूज्य गुरुदेव पंडित ह्रदयरंजन शर्मा (अध्यक्ष )श्री गुरु ज्योतिष शोध संस्थान गुरु रत्न भंडार पुरानी कोतवाली सर्राफा बाजार अलीगढ़ यूपी WhatsApp नंबर-9756402981,7500048250