आगरालीक्स…आगरा में खान-पान के शौकीन चटनी बेहद पसंद करते हैं, क्या आप जानते हैं कि लाल चींटी की चटनी से लेकर तीन दर्जन तरह की हैं चटनी, , औषधियों गुणों से भरपूर। जानें
देश में तरह-तरह की चटनी बनाई जाती है, जिसमें लाल चींटी की चटनी भी शामिल है। जानिये चटनियों के बारे में।

आगरा में भी हैं चाट-चटनी के शौकीन
आगरा में सामान्यतः धनिया-पोधीना, खट्टी, मीठी चटनी का प्रयोग होता है। समोसे-कचौड़ी के शौकीन लोग भी इसी प्रकार की चटनी खाते हैं। डोसा खाने वाले लोग नारियल की चटनी का भी प्रयोग करते हैं पर देश में अन्य तरह की चटनियां भी हैं और इसे अन्य नाम से भी जानते हैं।
देशभर में इतने प्रकार की बनती है चटनी
उत्तर भारत में डून चेटिन, चम्बा की चुख, प्याज-इमली की चटनी, भांग की चटनी, लहुसन की चटनी, अमचूर-गुड़ की चटनी, भुने टमाटर की चटनी, पूर्वोत्तर भारत में लाइलोक चटनी, दल्ले-चिल्ली चटनी, कौंदयई चटनी, तुंगताप-अखुनि चटनी, हर्माचा रोत, मोसडेंग चरमा के अलावा देश के अन्य हिस्सों में गौर केरी की चटनी, अमरूद की हरी चटनी, बेंग साग चटनी, अंबा खट्टा मिर्ची ठेला, आलम पचड़ी, धनिया नारियल की चटनी, गौंगुर पचहड़ी की चटनी, हुरली कालू चटनी, ठेंगा चम्मंथी, तहोगयाल की चटनी बनाई जाती है।
लाल चींटी की चटनी की रेसपी
ओडिसा के कई इलाकों में अब लाल चींटी की चटनी भी खासी लोकप्रिय हो रही है। आदिवासी लोगों द्वारा बनाई जाने वाली चटनी में पहले लालचींटी और उसके अंडों को सुखाया जाता है और इसके बाद उसमें धनिया, हरीमिर्च के साथ थोड़ी शक्कर मिलाकर पीसा जाता है, जिससे चटनी टेस्टी हो जाती है। इसे एक साल तक कांच के जार में सुखाकर रखा जा सकता है।
औषधीय गुणों की वजह से हुई लोकप्रिय
आदिवासी समाज के लोगों का मानना है कि इसमें औषधीय गुण होतेहैं, जिसकी वजह से दर्द, कफ, खांसी में आराम मिलता है। लालचींटी की चटनी में कई तरह के विटामिन भी होते हैं।