आगरालीक्स… आगरा में महिलाएं यूटीआई की शिकार हो रही हैं, पुरुषों की तुलना में महिलाओं का मूत्राशय छोटा होता है, इसके चलते नौकरीपेशा हर दूसरी महिला को संक्रमण हो रहा है। आधुनिक जीवनशैली के कारण महिलाओं के बीच यूरिनरी ट्रैक्ट इनफेक्शन यूटीआई आम रोग बन चुका है। जिसका सबसे बड़ा और सामान्य कारण है अस्वच्छ शौचालयों का इस्तेमाल करना। बात अगर नौकरीपेशा महिलाओं की की जाए तो रोग हर दूसरी महिला को अपनी गिरफ्त में ले लेता है। यह रोग हालांकि बहुत खतरनाक नहीं है लेकिन अगर समय रहते ध्यान न दिया जाए तो यह किडनी तक को प्रभावित कर सकता है। यह कहना है मेदांता मेडिसिटी गुड़गांव कीं डा. अमिता जैन का।
क्लब 35 प्लस की ओर से मंगलवार को संजय प्लेस स्थित होटल लाॅर्ड्स इन में महिलाओं में बढ़ती यूटीआई की समस्या को देखते हुए इस रोग के प्रति जागरूकता पर एक कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें डा. अमिता जैन ने कहा कि यूटीआई (मूत्र मार्ग संक्रमण) एक बैक्टीरिया जनित संक्रमण है, जो मूत्र पथ को संक्रमित करता है। मूत्र पथ संक्रमण पुरूषों की तुलना में महिलाओं को अधिक होता है। यह महिलाओं में होने वाला आम संक्रमण है, क्योंकि महिलाओं में यूरेथ्रा (मूत्राशय) छोटा एवं सीधा होता है जिसकी वजह से बैक्टीरिया आसानी से ब्लैडर में प्रवेश कर जाता है। यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन ज्यादातर महिलाओं को अपने जीवनकाल में एक बार इस परेशानी का सामना करना पड़ता है। कुछ महिलाओं में जल्दी-जल्दी यूटीआई की समस्या होती है। ऐसे में कुछ विशेष बातों का ध्यान रखना जरूरी है। आगरा कीं वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ एवं फाॅग्सी कीं पूर्व अध्यक्ष डा. जयदीप मल्होत्रा ने कहा कि यूटीआई बच्चों से लेकर बुजुर्ग किसी को भी हो सकता है लेकिन सबसे जयादा महिलाएं इससे प्रभावित होती हैं। मीनोपाॅज के बाद बुजुर्ग महिलाओं में एस्ट्रोजन हार्मोन का निर्माण कम होने, यूरेथ्रा कमजोर होने या सिकुड़ने से भी यूटीआई हो सकता है। पुरूषों के मुकाबले महिलाओं में यूरेथ्रा छोटा होता है। इससे बैक्टीरिया ब्लैडर को को जल्दी प्रभावित करते हैं। गंदे शौचालयों या शौचालयों की कमी जैसे कारणों से भी बडी संख्या में महिलाएं इसकी शिकार हो जाती हैं।
रेनबो हाॅस्पिटल के निदेशक डा. नरेंद्र मल्होत्रा
रेनबो हाॅस्पिटल के निदेशक डा. नरेंद्र मल्होत्रा ने मूत्र असंयमितता, रिसाव या बार-बार पेशाब की समस्या पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि वैसे तो यह अधिकांश यूटीआई के कारण होता है, लेकिन कई बार दूसरी तरह की समस्याओं के चलते भी यह होता है। डा. नरेंद्र ने बताया कि ज्यादातर मामलों में देखा गया है कि महिलाएं इन समस्याओं को छिपाती रहती हैं, जो बाद में जाकर बड़ी परेशानी का कारण बनता है। उन्हें इसके बारे में परिवार के किसी सदस्य से या डाॅक्टर से बात करनी चाहिए। आज ऐसे सभी रोगों का इलाज संभव है। फेमिलिफ्ट लेजर सिस्टम एक आधुनिक तकनीक है जो इनके इलाज में महिलाओं के लिए वरदान साबित हो रही है। इसमें दो से तीन सिटिंग में रोग का इलाज किया जा सकता है। इसकी सफलता दर 80 से 90 प्रतिशत तक देखी गई है।
क्लब कीं अध्यक्ष अशु मित्तल
क्लब कीं अध्यक्ष अशु मित्तल ने कहा कि क्लब 35 प्लस आगरा में 35 से अधिक आयुवर्ग की महिलाओं को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक बनाने और बेहतर जीवन जीने के लिए जागरूक बनाने का काम कर रहा है। समय-समय पर महिलाओं से जुड़ी तमाम समस्याओं पर कार्यशाला आयोजित की जाती हैं, जिनसे उनमें जागरूकता आए। यूटीआई पर आज यह कार्यशाला खास थी, क्योंकि यह बहुत जल्दी महिलाओं को अपना शिकार बना लेता है।

इस अवसर पर डॉ सविता त्यागी, मीनाक्षी मोहन, मोनिका अग्रवाल, लवली कथूरिया, सुधा कपूर, राशि गर्ग, नीलू सिंघल आदि मौजूद थे।