
सोमवार से ही दिल्ली के 25 सरकारी अस्पतालों के 15 हजार डॉक्टर हड़ताल पर हैं। इसमें नगर निगम, राज्य सरकार और केंद्र सरकार के अस्पतालों के डॉक्टर भी शामिल हैं। सोमवार को डॉक्टरों के हड़ताल पर जाने के चंद घंटों बाद ही दिल्ली सरकार ने उन्हें मनाने की कोशिशें तेज कर दी थी। स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन ने डॉक्टरों की सभी 24 मांगें मान लेने की बात कही थी लेकिन डॉक्टर हड़ताल पर डटे रहे।
डॉक्टरों की मांगें
डॉक्टरों का कहना है कि दिल्ली के अस्पतालों में सुविधाओं की भारी कमी है। इससे मरीजों की समय पर जांच नहीं हो पा रही है। मरीजों को दवा नहीं मिल रही है, इमरजेंसी में इलाज की पूरी सुविधा नहीं मिल रही है। ऐसे में मरीजों का गुस्सा उन पर निकलता है। डॉक्टरों का कहना है कि सुविधाएं बेहतर की जाएं। डॉक्टर काम के घंटे निर्धारित करने और समय पर वेतन का भुगतान करने की भी मांग कर रहे हैं।
क्या है एस्मा
आवश्यक सेवा अनुरक्षण कानून (एस्मा) हड़ताल को रोकने के लिए लगाया जाता है। एस्मा लागू करने से पहले इससे प्रभावित होने वाले कर्मचारियों को किसी माध्यम से सूचित किया जाता है। अधिकतम छह महीने के लिए एस्मा लगाया जा सकता है। इसके लागू होने के बाद अगर कोई कर्मचारी हड़ताल पर जाता है तो वह अवैध और दंडनीय है। एस्मा लागू होने के बाद सरकार के आदेश को नहीं मानने पर संबंधित कर्मचारी को बिना वारंट के गिरफ्तार किया जा सकता है।
डॉक्टरों पर होगी कठोर कार्रवाई: केजरीवाल
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली : रेजिडेंट डॉक्टरों की हड़ताल खत्म नहीं होने पर मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने गहरी नाराजगी जताई थी। मंगलवार शाम को मुख्यमंत्री ने ट्वीट कर रेजिडेंट डॉक्टरों को चेताया था। उन्होंने डॉक्टरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की बात कही थी। मुख्यमंत्री ने कहा था कि हमने डॉक्टरों की सभी मांगें मान ली, मैंने खुद व्यक्तिगत रूप से हस्तक्षेप किया, बावजूद इसके डॉक्टर हडताल खत्म नहीं कर रहे हैं, अब क्या बचा है। इसके बाद केजरीवाल ने एक और ट्वीट किया। दूूसरे ट्वीट में मुख्यमंत्री ने कहा है कि मरीज परेशान हो रहे हैं। मैं डॉक्टरों से अपील करता हूं कि वे काम पर लौट आएं। यदि उनकी कुछ और मांगें होंगी तो उन्हें भी मान लिया जाएगा। लेकिन जनता को परेशान करना गलत है। केजरीवाल ने कहा कि हमें एस्मा लगाने पर मजबूर किया गया। यदि अब भी डॉक्टर काम पर वापस नहीं लौटते हैं तो जनता को हो रही परेशानी को देखते हुए हमारे पास और अधिक कठोर कार्रवाई के अलावा और कोई रास्ता नहीं बचेगा।
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