आगरालीक्स(08th September 2021 Agra News)… दस सितंबर को न करें चंद्र दर्शन, वरना लग सकता है आप पर बड़ा कलंक. अगर देख लिया तो इस मंत्र का करें जाप, नहीं लगेगा दोष.
आगरा की प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य अंशु पारीख ने बताया कि 10 सितंबर को गणेश चतुर्थी है। इस दिन आप भूलकर भी चंद्रमा के दर्शन नहीं करें। अगर गलती से कर लिया है तो आपके ऊपर बड़ा कलंक लग सकता है। उन्होंने इसके पीछे पौराणिक कथा भी बताई।
यह है पौराणिक कथा
मान्यता के अनुसार, एक दिन गणपति चूहे की सवारी करते हुए गिर पड़े तो चंद्र ने उन्हें देख लिया और हंसने लगे। चंद्रमा को हंसी उड़ाते देख गणपति को बहुत गुस्सा आया और उन्होंने चंद्र को श्राप दिया कि अब से तुम्हें कोई देखना पसंद नहीं करेगा। जो तुम्हें देखेगा वह कलंकित हो जाएगा। इस श्राप से चंद्र बहुुत दुखी हो गए। तब सभी देवताओं ने गणपति की साथ मिलकर पूजा कर उनका आवाह्न किया। तब गणपति ने प्रसन्न होकर उनसे वरदान मांगने को कहा। तब देवताओं ने विनती की कि आप गणेश को श्राप मुक्त कर दो।
एक दिन के लिए मान्य रहेगा
गणपति ने कहा कि मैं अपना श्राप तो वापस नहीं ले सकता लेकिन इसमें कुछ बदलाव जरूर कर सकता हूं। भगवान गणेश ने कहा कि चंद्र का ये श्राप सिर्फ एक ही दिन मान्य रहेगा। इसलिए चतुर्थी के दिन यदि अनजाने में चंद्र के दर्शन हो भी जाएं तो इससे बचने के लिए छोटा सा कंकर या पत्थर का टुकड़ा लेकर किसी की छत पर फेंके। ऐसा करने से चंद्र दर्शन से लगने वाले कलंक से बचाव हो सकता है। इसलिए इस चतुर्थी को पत्थर चौथ भी कहते है

स्कंदपुराण में भगवान ने किया है वर्णन
ज्योतिषाचार्य अंशु पारीख ने बताया कि भाद्रपद मास के शुक्लपक्ष की चतुर्थी के चन्द्रमा के दर्शन हो जाने से कलंक लगता है। अर्थात् अपकीर्ति होती है। भगवान् श्रीकृष्ण को सत्राजित् ने स्यमन्तक मणि की चोरी का आरोप लगाया था। क्योंकि उन्होने भाद्रपद के शुक्लपक्ष की चतुर्थी तिथि को चन्द्रमा का दर्शन किया था, जिसके फलस्वरूप आपको व्यर्थ ही कलंक लगा। स्कन्दमहापुराण में भगवान श्रीकृष्ण ने स्वयं कहा है कि भादव के शुक्लपक्ष के चन्द्र का दर्शन मैंने गोखुर के जल में किया, जिसका परिणाम मुझे मणि की चोरी का कलंक लगा।
ऐसे पाएं मुक्ति
यदि (भाद्रपद) भादव के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी का चंद्रमा दिख जाय तो कलंक से कैसे छूटें। यदि उसके पहले द्वितीया का चंद्र्मा आपने देख लिया है तो चतुर्थी का चन्द्र आपका बाल भी बांका नहीं कर सकता। इसके अलावा आप भागवत की स्यमन्तक मणि की कथा सुन लीजिए।
अथवा निम्नलिखित मन्त्र का 21 बार जप कर लें।
ये है मंत्र
सिंहः प्रसेनमवधीत् सिंहो जाम्बवता हतः ।
सुकुमारक मा रोदीस्तव ह्येष स्यमन्तकः ।।