आगरालीक्स(10th September 2021)… आज रात आप चंद्रमा के दर्शन नहीं करें नहीं तो लग जाएगा चोरी का झूठा आरोप.
आज हर घर में गजानन पधारे हुए हैं। बुद्धि, समृद्धि और सौभाग्य के देवता भगवान गणेश जी के जन्म दिन का उत्सव धूमधाम से मनाया जा रहा है। लेकिन आज के दिन चंद्रमा के दर्शन नहीं करें। अगर आप ऐसा करते हैं तो आप पर चोरी का झूठा आरोप या दोष या मिथ्या कलंक लग सकता है।
कृष्ण को भी लगा था मिथ्या आरोप
अलीगढ़ के ज्योतिषाचार्य पंडित हृदय शर्मा ने बताया कि कथा के अनुसार,पौराणिक गाथाओं के अनुसार, भगवान कृष्ण पर स्यमन्तक नाम की कीमती मणि चोरी करने का झूठा आरोप लगा था। झूठे आरोप में लिप्त भगवान कृष्ण की स्थिति देख के नारद ऋषि ने उन्हें बताया कि भगवान कृष्ण ने भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी के दिन चन्द्रमा को देखा था, जिसकी वजह से उन्हें मिथ्या दोष का श्राप लगा है।

चंद्रमा को दिया था श्राप
नारद ऋषि ने भगवान कृष्ण को आगे बतलाते हुए कहा कि भगवान गणेश ने चन्द्र देव को श्राप दिया था कि जो व्यक्ति भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी के दौरान चन्द्र के दर्शन करेगा, वह मिथ्या दोष से अभिशापित हो जाएगा। समाज में चोरी के झूठे आरोप से कलंकित हो जायेगा। नारद ऋषि के परामर्श पर भगवान कृष्ण ने मिथ्या दोष से मुक्ति के लिये गणेश चतुर्थी के व्रत को किया और मिथ्या दोष से मुक्त हो गए।
पंडित हृदय नारायण शर्मा ने बताया कि एक दिन गणपति चूहे की सवारी करते हुए गिर पड़े तो चंद्र ने उन्हें देख लिया और हंसने लगे। चंद्रमा को हंसी उड़ाते देख गणपति को बहुत गुस्सा आया और उन्होंने चंद्र को श्राप दिया कि अब से तुम्हें कोई देखना पसंद नहीं करेगा। जो तुम्हें देखेगा वह कलंकित हो जाएगा। इस श्राप से चंद्र बहुुत दुखी हो गए। तब सभी देवताओं ने गणपति की साथ मिलकर पूजा कर उनका आवाह्न किया। तब गणपति ने प्रसन्न होकर उनसे वरदान मांगने को कहा। तब देवताओं ने विनती की कि आप गणेश को श्राप मुक्त कर दो।
तब गणपति ने कहा कि चंद्र का ये श्राप सिर्फ एक ही दिन मान्य रहेगा।
ये करें उपाय
चतुर्थी के दिन यदि अनजाने में चंद्र के दर्शन हो भी जाएं तो इससे बचने के लिए छोटा सा कंकर या पत्थर का टुकड़ा लेकर किसी की छत पर फेंके। ऐसा करने से चंद्र दर्शन से लगने वाले कलंक से बचाव हो सकता है। इसलिए इस चतुर्थी को पत्थर चौथ भी कहते है
ऐसे पाएं मुक्ति
यदि (भाद्रपद) भादव के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी का चंद्रमा दिख जाय तो कलंक से कैसे छूटें। यदि उसके पहले द्वितीया का चंद्र्मा आपने देख लिया है तो चतुर्थी का चन्द्र आपका बाल भी बांका नहीं कर सकता। इसके अलावा आप भागवत की स्यमन्तक मणि की कथा सुन लीजिए।
अथवा निम्नलिखित मन्त्र का 21 बार जप कर लें।
ये है मंत्र
सिंहः प्रसेनमवधीत् सिंहो जाम्बवता हतः ।
सुकुमारक मा रोदीस्तव ह्येष स्यमन्तकः ।।