आगरालीक्स.. आगरा के आंबेडकर विवि में शातिर क्लर्क दलालों के साथ मिलकर कॉपी में नंबर बढा रहा था, इसके लिए आरटीआई की मदद ली गई, पूरा मामला खुल गया, क्लर्क को सस्पेंड कर दिया है।
आगरा के डॉ भीमराव आंबेडकर विवि में मूल्यांकन में सख्ती कर दी गई है, इससे कॉपी में अंक बढाने का खेल बंद हो गया है। ऐसे में शातिर वरिष्ठ क्लर्क रियाजुददीन ने दलालों के साथ मिलकर एक तरीका निकाला। जिन छात्र छात्राओं के कम अंक हैं और फेल हो गए हैं, उनसे नंबर बढाने का ठेका लिया। इसके बाद छात्र से आरटीआई के तहत कॉपी देखने के लिए आवेदन कराया। बीए, बीएससी और बीकॉम के लिए 300 रुपये और एमए, एमएससी और एमकॉम की कॉपी 500 रुपये में आनलाइन दिखाई जाती है। इस कॉपी को देखने के बाद छात्र आवेदन करते हैं कि कॉपी में नंबर सही तरह से नहीं जोडे गए हैं। इस गडबडी को सही करने के लिए कॉपी को रिकॉर्ड रूम से निकालकर अंक जोडे जाते हैं।
कॉपी में बढा देता था अंक
अंक जोडने के लिए एजेंसी के रिकॉर्ड रूम से क्लर्क रियाजुददीन कॉपी निकालता था, इस कॉपी में अंक बढा दिए जाते थे, इसके बाद अंकों को जोडने के बाद रिपोर्ट दी जाती थी कि अंक सही तरह से नहीं जुडे हैं, कॉपी में जो नंबर बढाए गए थे उन्हें जोडकर छात्रों के अंक बढा दिए जाते थे। इसे एजेंसी को दे दिया जाता था और एजेंसी रिजल्ट में नंबर बढा देती थी।
स्कैन कॉपी से खुला मामला
पिछले कुछ दिनों में ही तीन हजार कॉपी को आरटीआई से देखने के लिए आवेदन आ गए, इस पर शक हुआ। विवि प्रशासन ने पूर्व में देखी गईं कॉपी की जांच कराई। क्योंकि मूल्यांकन के बाद एजेंसी द्वारा कॉपी स्कैन की जाती हैं, टीम ने वनस्पति विज्ञान की एमएससी की छात्रा की स्कैन कॉपी देखी और आरटीआई से मांगी गई सूचना के बाद रिकॉर्ड रूम से कॉपी को निकालकर अंक बढाने वाली कॉपी को देखा, दोनों में नंबर अलग थे, जब रिकॉर्ड रूम की कॉपी के पन्ने पलटे गए थे उसमें एक सवाल के जवाब में तीन अंक बढाए गए थे, ये सापफ दिखाई दे रहे थे।
क्लर्क किया सस्पेंड पहले जा चुका है जेल
कुलपति डॉ अरविंद दीक्षित के निर्देश पर क्लर्क रियाजुददीन को सस्पेंड कर दिया है, वह पहले सामानांतर विवि चलाने पर जेल भी जा चुका है।