आगरालीक्स आगरा के डॉ भीमराव आंबेडकर विवि के दीक्षांत समारोह के मुख्य अतिथि ग्रह मंत्री राजनाथ सिंह को गुस्सा आ गया, सख्त लहजे में कहा कि वहां से हट जाइए, दीक्षांत भाषण समाप्त होने के बाद मेडल विजेताओं के इंटरव्यू ले सकते हैं। कुछ देर के लिए माहौल गर्मा गया, पुलिस ने मेडल विजेताओं के इंटरव्यू ले रहे मीडिया कर्मियों को अलग कर दिया, इसके बाद उन्होंने संबोधित किया।
सोमवार को विवि के खंदारी परिसर में आयोजित 84 वें दीक्षांत समारोह में ग्रह मंत्री राज नाथ सिंह ने कहा कि भारत 2030 तक विश्व की तीसरी महाशक्ति बन जाएगा। देश 2014 में 9वें नंबर पर था, अब छठे पर है। देश धनवान हो रहा है। झुग्गी झोपड़ी में रहने वाले लोग भी देश की अर्थव्यवस्था में सहयोग दें, इसकी व्यवस्था प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कर रहे हैं। पीएम मोदी ने दुनियाभर में हिंदी का मान बढ़ाया है। दुनिया हमारी नकल करके खुद को महान बताती है। सारे महत्वपूर्ण सिद्धांत हमारे ऋषि मुनियों ने दिए हैं।

बिना संस्कार, मूल्य और मनोभाव के व्यक्ति के समग्र व्यक्तित्व का विकास संभव नहीं है। वर्ड ट्रेड सेंटर को गिराने के लिए अपनी जिंदगी को अंधेरे में डालने वाले के पास अच्छा कैरियर और पैकेज था। वह पढ़ा लिखा था। लेकिन उसने ऐसा क्यों किया? क्योंकि उसका मनोभाव ठीक नहीं था। मैं हर दीक्षांत समारोह में छात्रों से संस्कार और मनोभाव ठीक रखने की जरूर बात कहता हूं।
गृहमंत्री सिंह ने कहा हर दीक्षांत समारोह में बच्चों से कहता हूं कि संस्कार, मूल्य और मनोभाव को ठीक करके रखना। ये प्रयत्न आपके द्वारा निरंतर करते रहना चाहिए। मैं जानता हूं पढ़ाई के बाद आपकी इच्छा होगी शानदार नौकरी मिले। अच्छा वेतन हो, शानदार मकान मिले। सब मिलाकर अच्छा पैकेज मिले।
उन्होंने कहा कि लेकिन, जीवन में सिर्फ इतना ही नहीं है। उन्होंने न्यूयार्क का सबसे ऊंचा वर्ड ट्रेड सेंटर की याद दिलाई। कहा कि एक व्यक्ति पढ़ा लिखा था, जिसका अच्छा कैरियर और अच्छा पैकेज था। उसने हवाई जहाज उड़ाते उड़ाते अपने को मौत के अंधेरे में डाल दिया और हजारों को मौत के नींद सुला दी।
सब कुछ होने के बाद भी उसने ऐसा क्यों किया, क्योंकि उसका मनोभाव ठीक नहीं था। बुद्धि से विचार पैदा नहीं होते हैं। मन और मनोभाव से ही विचार पैदा होते हैं। बुद्धि को गाइड करने का कोई काम करता है, तो वह मन और मनोभाव है। आपके मन का भाव अच्छा होना चाहिए
राज्यपाल राम नाईक ने कहा पढ़ाई में लड़कियों ने लड़कों को पछाड़ दिया है। स्नातक करने के साथ मेडल पाने में लड़कियां बहुत आगे निकल गई हैं। विश्वविद्यालय में भी तेजी से सुधार हुआ है।