आगरालीक्स… आज दशहरा है, पूजा का शुभ मुहूर्त, शस्त्र पूजा, दोपहर तीन बजे तक है धनिष्ठा नक्षत्र.
प्रसिद्ध (ज्योतिषाचार्य )गुरूदेव पंडित ह्रदय रंजन शर्मा (अध्यक्ष )श्री गुरु ज्योतिष शोध संस्थान गुरु रत्न भंडार के अनुसार, दशमी तिथि प्रारंभ 23 अक्टूबर 2023 सोमवार सायं 05:44 से दशमी तिथि का समापन 24 अक्टूबर 2023 दिन मंगलवार दोपहर 03:14 बजे तक । श्रवण नक्षत्र 23 अक्टूबर 2023 की सांय 05:13 बजे से 24 अक्टूबर 2023की दोपहर 03:27 मिनट तक रहेगा इसके बाद धनिष्ठा नक्षत्र प्रारंभ हो जाएगा.
मंगलवार सुबह 09:16 से दोपहर 01:27 तक विजय दशमी दशहरा पर विशेष शुभ मुहूर्त का समय कहा जायेगा इसी बीच शस्त्र पूजा किताब कॉपियों की पूजा के लिए अभिजीत मुहूर्त दिवाकाल11:20 से दोपहर 12:15 के बीच छठ पूजा का सर्वोत्तम समय रहेगा इस समय संकल्प, शुभारंभ ,नूतन कार्य ,गुरु पूजन ,अस्त्र शस्त्र पूजन, शमी पूजन ,वाहन विवाह शादी की खरीदारी भूमि भवन हेतु किसी भी कार्य का शुभारंभ किसी भी विशेष कार्य हेतु अनुष्ठान पूजा पाठ गृह प्रवेश नए कार्य का शुभारंभ हेतु सर्वोत्तम समय कहां जाएगा इस समय विश्व प्रसिद्ध चौघड़िया मुहूर्त अनुसार चर ,लाभ ,अमृत के तीन विश्व प्रसिद्ध चौघड़िया मुहूर्त उपलब्ध होंगे जो किसी भी कार्य के लिए सर्वोत्तम कहे जाते हैं इसके बाद एक और शुभ मुहूर्त “विजय मुहूर्त” के नाम से दोपहर 12:10 से दोपहर 01:27 के बीच में है शुभ का चौघड़िया मुहूर्त उपलब्ध होगा जो किसी भी शुभ कार्य हेतु अत्यंत महत्वपूर्ण एवं लाभदायक कहा जाएगा
सर्व सिद्धि दायक विजय काल- दशहरे के दिन शाम को जब सूरज अस्त होने का समय और आकाश में तारे उदय होने का समय होता है वह है सर्व सिद्धि दायक विजय कहलाता है
दशहरे के दिन जपा जाने वाला विजयी अचूक कारगर मंत्र -दशहरे की शाम के समय प्रत्येक व्यक्ति को
♦(ॐ अपराजितायै नमः )
मंत्र की 1,2,5,7 या 9 मालाओं का जाप करना चाहिए इससे किसी भी कार्य में विजय प्राप्त होती है मुकदमा जीत विवाह शादी एवं किसी भी कार्य में व्यक्ति की हार नहीं होती है यह अत्यंत अचूक मंत्र है
अश्विन (क्वार) मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को विजय दशमी या दशहरे के नाम से मनाया जाता है। भगवान राम ने इसी दिन रावण का वध किया था। इसे असत्य पर सत्य की विजय के रूप में मनाया जाता है। इसीलिये इस दशमी को विजयादशमी के नाम से जाना जाता है। दशहरा वर्ष की तीन अत्यन्त शुभ तिथियों में से एक है, अन्य दो हैं चैत्र शुक्ल की एवं कार्तिक शुक्ल की प्रतिपदा
नया कार्य करते हैं शुरू
इसी दिन लोग नया कार्य प्रारम्भ करते हैं, शस्त्र-पूजा की जाती है। प्राचीन काल में राजा लोग इस दिन विजय की प्रार्थना कर रण-यात्रा के लिए प्रस्थान करते थे। इस दिन जगह-जगह मेले लगते हैं। रामलीला का आयोजन होता है। रावण का विशाल पुतला बनाकर उसे जलाया जाता है। दशहरा अथवा विजयदशमी भगवान राम की विजय के रूप में मनाया जाए अथवा दुर्गा पूजा के रूप में, दोनों ही रूपों में यह शक्ति-पूजा का पर्व है, शस्त्र पूजन की तिथि है। हर्ष और उल्लास तथा विजय का पर्व है। भारतीय संस्कृति वीरता की पूजक है, शौर्य की उपासक है। व्यक्ति और समाज के रक्त में वीरता प्रकट हो इसलिए दशहरे का उत्सव रखा गया है। दशहरा का पर्व दस प्रकार के पापों- काम, क्रोध, लोभ, मोह मद, मत्सर, अहंकार, आलस्य, हिंसा और चोरी के परित्याग की सद्प्रेरणा प्रदान करता है
प्रसिद्ध (ज्योतिषाचार्य)परमपूज्य गुरूदेव पंडित ह्रदय रंजन शर्मा (अध्यक्ष )श्री गुरु ज्योतिष शोध संस्थान गुरु रत्न भंडार पुरानी कोतवाली सराफा बाजार अलीगढ़ यूपी व्हाट्सएप नंबर-9756502981,7500048250