आगरालीकस…(20 November 2021 Agra News) बांझपन की जिम्मेदार महिलाएं ही नहीं पुरुष भी होते हैं. लेकिन अब तकनीकी ऐसी आ गई है कि इसका उपचार भी है. बस जरूरत है समझने की. जानिए क्या कहा विशेषज्ञों ने
एओजीएस की कार्यशाला में विशेषज्ञों ने दी जानकारी
हमारे देश में बांझपन का जिम्मेदार हमेशा महिलाओं को ही ठहराया जाता है, जबकि पुरुषों में भी बांझपन के जिम्मेदार उतने ही कारक हैं, जितने कि महिलाओं में। हालांकि तकनीक काफी आगे बढ़ गई है और उपचार भी उपलब्ध है। बस जरूरत है इसे समझने की और सही समय पर चिकित्सक से सलाह लेने की। यह कहना है विशेषज्ञों का। आगरा ऑब्स एंड गायनी सोसायटी की एक कार्यशाला शनिवार रात 8.30 बजे होटल होली डे इन में आयोजित हुई। इसमें गर्भावस्था, गर्भधारण, आईवीएफ, आईयूआई समेत कई विषयों और इलाज की आधुनिक तकनीकों पर चर्चा हुई।
बांझपन के मरीज बहुत बढ़ रहे हैं
एओजीएस की अध्यक्ष डॉ आरती मनोज ने कहा कि वर्तमान समय में बांझपन के मरीजों की संख्या में खासी बढोत्तरी हो रही है। इसके कारण स्त्री या पुरुष किसी में भी हो सकते हैं। महिलाओं में अंडों का विकसित न होना, नलों में रुकावट मुख्य कारण हैं, जबकि पुरुषों में शुक्राणुओं की संख्या कम होना प्रमुख कारण है। सीक्रेट्स ऑफ ओव्यूलेशन इंडक्शन विषय पर व्याख्यान देते हुए वरिष्ठ स्त्री रोग एवं आईवीएफ विशेषज्ञ डॉ रजनी पचौरी ने अंडों को विकसित करने की आधुनिक दवाओं और तरीकों पर जानकारी दी।
पैनल डिस्कशन हुआ
इस सत्र की अध्यक्षता डॉ संधि जैन और डॉ अनुपम त्यागी ने की। वहीं आईयूआई की सफलता दर बढाने पर पैनल डिस्कशन हुआ, इसमें शुक्राणुओं की कमी या बिना कारण के गर्भ न ठहरने, शुक्राणु सीधे गर्भाशय में डालने के तरीकों पर चर्चा की गई। एओजीएस की सचिव डॉ सविता त्यागी ने कहा कि निसन्तान दम्पतियों के लिए आधुनिक उपचार पद्धतियां मौजूद हैं, बस जरूरत है इस बारे में जानकारी हासिल करने की। सही समय पर विशेषज्ञ चिकित्सकों से मिलकर सलाह लेना ही बेहतर साबित होता है। पैनल डिस्कशन में डॉ रजनी पचौरी, डॉ अमित टण्डन, डॉ देबाशीष सरकार, डॉ सुधा बंसल शामिल थे। विशेषज्ञ पैनलिस्ट डॉ संध्या अग्रवाल और डॉ सरोज सिंह थे। मध्यस्थता डॉ दीक्षा शर्मा गोस्वामी ने की। संचालन डॉ अनुश्री रावत और डॉ जसनीत कौर ने किया।