आगरालीक्स(25 July 2021 Agra News)। भारत में सिजेरियन के साथ पहली बार पौने दो किलो की रसौली का जटिल ऑपरेशन आगरा के डॉ. अमित टंडन ने कराया है। इससे पूर्व कोलकाता में सिजेरियन के साथ डेढ़ किलो की रसौली को ऑपरेट किया जा चुका है।
डॉक्टर बोले, पहले रसौली निकलवाओ
कमलेश टंडन हॉस्पीटल में रविवार को प्रेसवार्ता में डॉ. अमित टंडन ने बताया कि झांसी निवासी मरीज रसौली की समस्या के कारण गर्भधारण नहीं कर पा रही थी। गर्भाशय को खतरा न पहुंचे, इसलिए रसौली का ऑपरेशन नहीं कराया। गर्भधारण होने पर कई डॉक्टरों को दिखाया। तब डॉक्टरों ने सलाह दी कि पहले रसौली निकलवाओ, तभी गर्भ रुक पाएगा। ऐसा नहीं करने पर दिक्कत हो सकती है। तब वह डॉ. अमित टंडन के पास पहुंची। डॉ. टंडन ने नौ माह पूरे होने पर उसके सिजेरियन कराने के साथ रसौली के ऑपरेशन की भी जिम्मेदारी ली।
दो किलो के स्वस्थ शिशु को दिया जन्म
डॉ. अमित टंडन का कहना है कि हाल ही में दो किलो के स्वस्थ शिशु के जन्म के साथ पौने दो किलो की रसौली भी निकाली। उन्होंने बताया कि भारत में सिजेरियन के साथ पौने दो किलो की रसौली निकालने का यह पहला ऑपरेशन है।
सात घंटे का मैराथन आपरेशन, निकालीं 28 रसौली
उन्होंने बताया कि इसके साथ ही 21 वर्ष की अविवाहित युवती का सात घंटे के मैराथन ऑपरेशन के साथ छोटी-बड़ी 28 रसौली (ढाई किलो की) गर्भाशय को सुरक्षित रखते हुए निकाली। इस युवती को डॉक्टरों ने कहा था कि माता-पिता इसकी शादी न करें। इसकी बच्चेदानी निकालनी पड़ेगी। 31 वर्ष की अविवाहित युवती के 45 छोटी-बड़ी रसौली थी, जिनका आकार नौ माह के गर्भ के समान हो गया था। गर्भाशय न निकालना पड़े, इस डर से युवती एक वर्ष से ऑपरेशन नहीं करा रही थी। उसका भी सफल ऑपरेशन लेप्रोस्कोपिक विधि से किया गया।

घबराएं नहीं महिलाएं
डॉ. टंडन ने कहा कि रसौली की समस्या से पीड़ित महिलाएं घबराएं नहीं। आधुनिक तकनीकी से गर्भाशय को सुरक्षित रखते हुए रसौली का जटिल ऑपरेशन सम्भव है।
रसौली की समस्या से गुजर रहे हैं तो इन लक्षणों पर ध्यान दें..
-भारी रक्तस्त्राव या कई दिनों तक माहवारी का चलना।
-पेट के निचले हिस्से में दर्द होना।
-बार-बार पेशाब करने की इच्छा होना, कब्ज।
-पीठ या पैर में दर्द होना (जो माहवारी से पहले बढ़ जाए)।