आगरालीक्स …आगरा में मायावती की रैली से पहले मंच पर दहाडने वाले बसपा के पूर्व सांसद ब्रजेश पाठक को क्या हुआ कि उन्होंने 24 घंटे बाद ही भाजपा ज्वाइन कर ली। हालांकि, उन्हें बसपा के राष्ट्रीय महासचिव सतीश मिश्रा ने पार्टी विरोधी गतिविधियों पर पार्टी से निकाल दिया, उनका बयान आने के कुछ मिनट बाद ही दिल्ली में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह की मौजूदगी में पार्टी की सदस्यता ले ली। इसके बाद से बसपा को बडा झटका लगा है।
पूर्व सांसद ब्रजेश पाठक हरदोई के रहने वाले हैं और छात्र संघ अध्यक्ष भी रहे, वे दबंग छवि के नेता है। उन्होंने 2002 में कांग्रेस के टिकट से हरदोई की मलवा विधानसभा सीट से चुनाव लडा था, लेकिन हार गए थे। उन्नाव से 2004 में सांसद चुने गए थे और 2008 में राज्यसभा सदस्य थे। बसपा ने उनकी पत्नी नम्रता पाठक को राज्य मंत्री का दर्जा दिया था और 2012 में विधानसभा चुनाव भी लडाया था, लेकिन वे हार गए गईं थी।
रविवार को आगरा में बसपा की चुनावी रैली में पूर्व सांसद ब्रजेश पाठक संयोजक थे, उन्होंने भाजपा, कांग्रेस और सपा को आडे हाथ लिया था। वे यहां एक दिन पहले ही आ गए थे और मायावती की रैली से पहले उन्होंने मंच से संबोधित भी किया था। रैली में भीड भी अच्छी थी, लेकिन 24 घंटे बाद ही उनके भाजपा की सदस्यता लेने की खबरें आने लगी। इससे पहले बसपा के राष्ट्रीय महासचिव सतीश मिश्रा ने उन्हें पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने पर पार्टी से निकाल दिया। काफी समय से वह पार्टी की नीतियों के खिलाफ काम कर रहे थे।
नाराज थे ब्रजेश पाठक
बताया जाता है कि पार्टी में ब्राह्मण भाईचारा कमेटी में पर्याप्त जगह नहीं मिलने से वह उपेक्षित महसूस कर रहे थे। वह बसपा में महत्वपूर्ण ब्राह्मण नेता समझे जाते थे। उन्नाव से 2004 में सांसद चुने गए थे और 2008 में राज्यसभा सदस्य थे। बसपा ने उनकी पत्नी को भी इससे पहले उनके सगे बड़े भाई को ढाई महीने पहले बसपा से निकाला जा चुका है। वहीं उनके साले व पूर्व एमएलसी गुड्डू त्रिपाठी को भी लगभग दो महीने पहले बसपा ने बाहर का रास्ता दिखा दिया था। पाठक इससे भी असंतुष्ट थे।
स्वामी प्रसाद ने भी छोड़ी थी बीएसपी
पिछले कुछ दिनों में बीएसपी के कई नेताओं ने मायावती पर अलग-अलग आरोप लगाते हुए पार्टी छोड़ी है। इसमें सबसे बड़ा नाम स्वामी प्रसाद मौर्य का है।
स्वामी ने मायावती पर टिकट बेचने का आरोप लगाकर बीएसपी छोड़ी। बाद में वे बीजेपी में शामिल हो गए। जून के आखिर में पार्टी के पूर्व मंत्री आरके. चौधरी ने मायावती पर विधानसभा चुनाव के टिकट नीलाम करने का आरोप लगाते हुए पार्टी छोड़ दी।
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