
(इंटरनेट फोटो)
पैरानॉर्मल रिसर्चर गौरव तिवारी ने छह हजार भूतों और आत्माओं के लिए चर्चित जगहों का विजिट किया, वहां आधुनिक मशीनों से भूतों को ढूंढ निकालने के बाद उनसे बात करने की कोशिश की। इसी सिलसिले में गौरव तिवारी को पता चला था कि मथुरा की ब्रज चौरासी कोस परिक्रमा मार्ग में शिवताल है, यहां कई लोगों की मौत हो चुकी है। इस पर वह अपनी टीम के साथ नवंबर 2015 में शिवताल पहुंचा था।
पहली रात को काफी देर तक वे मशीनों से भूतों को तलाश करते रहे, लेकिन निगेटिव वेव्स नहीं मिली। इसके बाद अगली रात को ताल के एक किनारे पर मशीनों को निगेटिव वेव्स मिलीं। गौरव तिवारी की टीम का मानना था कि यहां पर भूतों की मौजूदगी है। लोगों का कहना था कि गंदगी की वजह से ऐसा हुआ होगा। स्थानीय लोगों का कहना है कि यहां पूर्व में कई अज्ञात शव मिल चुके हैं और ताल में डूबने से भी कई लोगों की मौत हुई है। इसकी वजह से यहां रात में जाने में लोगों को डर लगता है। उन्होंने कहा कि पैरानॉर्मल सोसायटी ने जब रिसर्च किया था उस दौरान वह मौजूद थे।
सालों पुराना शिवताल चौराकसी कोस परिक्रमा का है पहला पडाव
ऐसा कहा जाता है कि शिवताल की जगह पर भगवान शिव ने साढ़े बारह हजार साल तक तप किया था। द्वापर युग में श्रीकृष्ण के दर्शन करने के लिए शिवजी मथुरा आए थे, लेकिन मां यशोदा ने शिव के रूप को देख दर्शन कराने से मना कर दिया था। इसके बाद शिव यहां तप करने के लिए बैठ गए। बाद में श्रीकृष्ण ने शिवताल पर शिवजी को दर्शन दिए थे। इस वजह से इसे शिवताल कहते हैं। ब्रज चौरासी कोस की परिक्रमा शुरू होने पर पहला पड़ाव यहीं होता है। यहां जल के अंदर की बुर्जियों में बैठकर लोग भजन-ध्यान करते थे। इसके पास राधारमण बिहारी और राधा दामोदार दास जी का मंदिर है।
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