आगरालीक्स…। गीता जयंती 14 दिसंबर मंगलवार को है। यदि इस दिन गीता के श्लोकों का वाचन किया जाए तो मनुष्य के पूर्व जन्म के पापों का नाश होता है।
ज्योतिषाचार्य पंडित हृदय रंजन शर्मा के मुताबिक हिन्दू संस्कृति में यह दिन श्रीमद् भगवद्गीता की प्रतीकात्मक जयंती के रूप में मनाया जाता है। कौरवों और पांडवों के बीच युद्ध शुरू होने से पहले योगीराज भगवान श्रीकृष्ण ने 18 अक्षौहिणी सेना के बीच मोह में फंसे और कर्म से विमुख अर्जुन को गीता का उपदेश दिया था।
भागवत गीता में कई विद्याओं का वर्णन
श्रीकृष्ण ने अर्जुन को छंद रूप में यानी गाकर उपदेश दिया, इसलिए इसे गीता कहते हैं। चूंकि उपदेश देने वाले स्वयं भगवान थे, अत: इस ग्रंथ का नाम भगवद्गीता पड़ा। भगवद्गीता में कई विद्याओं का वर्णन है, जिनमें चार प्रमुख हैं- अभय विद्या, साम्य विद्या, ईश्वर विद्या और ब्रह्म विद्या। माना गया है कि अभय विद्या मृत्यु के भय को दूर करती है।
18 अध्यायों में अथाह ज्ञान
इसके छोटे-छोटे 18 अध्यायों में इतना सत्य, ज्ञान व गंभीर उपदेश हैं, जो मनुष्य मात्र को नीची से नीची दशा से उठाकर देवताओं के स्थान पर बैठाने की शक्ति रखते हैं।
गीता जयंती के दिन क्या करें
कहा जाता है कि इस दिन भगवद्गीता के दर्शन मात्र का बड़ा लाभ होता है। यदि इस दिन गीता के श्लोकों का वाचन किया जाए तो मनुष्य के पूर्व जन्म के दोषों का नाश होता है।
-गीता जयंती के दिन श्रीमद भगवद्गीता के दर्शन करें, इसके पश्चात् भगवान श्रीकृष्ण के
दर्शन कर उनसे सदा ही सद्बुद्धि देने के लिए प्रार्थना करें।
-इस दिन शंख का पूजन करना भी लाभकारी बताया गया है।
-इस दिन भगवान कृष्ण के विराट स्वरूप का पूजन भी अत्यंत ही उत्तम माना गया है।
– परिवार में कलह, क्लेश या झगड़े से संबंधित समस्याएं हैं तो गीता जयंती से ही भगवद्गीता के दर्शन करना प्रारंभ करना चाहिए।
