आगरालीक्स.. आगरा के आंबेडकर विवि में एमबीबीएस छात्र को छह नंबर देने पर तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा क्या विश्वविद्यालय को परीक्षाएं आयोजित कराने से रोक दिया जाए। जिससे कि इस प्रकार से छात्रों का भविष्य बर्बाद न हो।
आंबेडकर विवि से संबदृध् मेडिकल कॉलेज के एमबीबीएस छात्र को फिजियोलॉजी में छह अंक दिए गए हैं। छात्र ने आरटीआई से विवि से अपनी कॉपी प्राप्त कर इलाहाबाद हाईकोर्ट में दायर की। कॉपी चेक करने में में गड़बड़ी पाए जाने पर कोर्ट ने विश्वविद्यालय के कुलसचिव को तलब कर फटकार लगाई।कापियां नए सिरे से जांच के लिए मोतीलाल नेहरू मेडिकल कालेज प्रयागराज को भेज दी है। यह आदेश न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल और न्यायमूर्ति राजेंद्र कुमार की खंडपीठ ने मेडिकल के छात्र देवर्षि नाथ गुप्ता की याचिका पर दिया।
यह है मामला
याची के अधिवक्ता जेएन अब्बास का कहना था कि याची ने फिजियोलॉजी विषय की परीक्षा में कम अंक मिलने पर जनसूचना अधिकार अधिनियम के तहत अपनी उत्तर पुस्तिका मांगी थी। विश्वविद्यालय ने इसे उपलब्ध कराया तो पता चला कि उत्तर पुस्तिका में कई प्रश्नों के उत्तर जांचे ही नहीं गए हैं। तीन उत्तरों में मात्र दो-दो अंक दिए गए हैं। कोर्ट के समक्ष उत्तर पुस्तिकाएं प्रस्तुत की गईं तो याची की दलील सही निकली।


कोर्ट ने कहा कि छात्र का भविष्य बर्बाद हो रहा
इस पर नाराजगी जताते हुए कोर्ट ने कहा कि हमें नहीं पता कि विश्वविद्यालय से ऐसी गलती कैसे हो गई जिससे किसी छात्र का भविष्य बर्बाद हो जाए। कहा कि यह वास्तव में हैरानी वाली बात है। कोर्ट ने जोर देते हुए कहा कि इस प्रकार की गलती वास्तव में विश्वविद्यालय की ओर से किया गया फ्राड है। कोर्ट ने विश्वविद्यालय के कुलसचिव को तलब करते हुए उनसे स्पष्टीकरण मांगा। पूछा कि क्यों न विश्वविद्यालय के खिलाफ गंभीर कार्रवाई की जाए। कोर्ट ने यह भी तल्ख लहजे में कहा कि क्या विश्वविद्यालय को परीक्षाएं आयोजित कराने से रोक दिया जाए। जिससे कि इस प्रकार से छात्रों का भविष्य बर्बाद न हो। कोर्ट के निर्देश पर कुलसचिव हाजिर हुए। उन्होंने मूल उत्तर पुस्तिका प्रस्तुत की। जिसमें वही गलतियां थीं। कोर्ट ने उत्तर पुस्तिका को तीन सेट में अलग-अलग सीलबंद लिफाफे में रखकर उसे प्राचार्य मोतीलाल नेहरू मेडिकल कालेज प्रयागराज के पास भेजने का निर्देश दिया। उन्हें आदेश दिया कि उत्तर पुस्तिकाओं का फिजियोलॉजी के तीन विशेषज्ञों से अलग-अलग मूल्यांकन कराकर कोर्ट को इसकी जानकारी दी जाए। याचिका की अगली सुनवाई 26 अप्रैल को होगी।