आगरालीक्स…(22 November 2021) आनंद ने गिफ्ट किया पत्नी मंजुषा को ‘ताजमहल’ जैसा घर. 4 बेडरूम वाले इस घर की खूबसूरती और खासियत जानेंगे तो आप भी कहेंगे ‘वाह ये है प्रेम’…
ताजमहल मोहब्बत का प्रतीक माना गया है. शहंशाह शाहजहां ने इसे अपनी पत्नी मुमताज की याद में बनाया. इसके लिए कई कहानियां भी प्रचलित हैं जैसे कोई फिर से दूसरा ताजमहल न बना सके इसके लिए शाहजहां ने ताजमहल बनाने वाले कारीगरों के हाथ कटवा दिए थे. इस बात में भले ही इतिहासकारों में मतभेद हों या न हों लेकिन ये बात सच है कि ताजमहल जैसी दूसरी इमारत फिर नहीं बन सकी है, हां लेकिन लोग शाहजहां के इस बेपनाह प्रेम से जरूर प्रभावित हैं और वो भी कोशिश करते हैं कि वो भी अपनी पत्नी या प्रेमिका के लिए कुछ ऐसा करें जो याद किया जाए. मध्य प्रदेश के रहने वाले एक शख्स ने तो ऐसा कर दिया जो आज सबसे ज्यादा चर्चा का विषय बना हुआ है. सोशल मीडिया से लेकर हर ओर उसके इस काम की तारीफ कर रहा है और पत्नी के प्रति उसके प्रेम को असली मोहब्बत बता रहा है.

जी हां! इस शख्स का नाम है शिक्षाविद् आनंद प्रकाश चौकसे. मध्यप्रदेश के बुरहानपुर में रहने वाले आनंद चौकसे ने अपनी पत्नी को गिफ्ट में ‘ताजमहल’ जैसा घर बनाकर दिया है. घर की खूबसूरती और खासियत जब लोगों को पता लगी तो वो भी ‘वाह’ कहना नहीं भूले. आनंद चौकसे ने अपना ये घर बिल्कुल हूबहू आगरा में बने प्रेम की निशानी ताजमहल की तरह बनवाया है. 4 बेडरूम वाले इस स्पेशल घर को उन्होंने अपनी पत्नी मंजूषा चौकसे को गिफ्ट में दिया है. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार आनंद चौकसे को ताजमहल जैसा घर बनाने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी. कई कारीगरों ने तो बिल्कुल साफ मना कर दिया. आनंद चौकसे का कहना है कि उन्होंने अपनी पत्नी के साथ ताजमहल के बारे में जानकारी हासिल करने के लिए ताजमहल का पूरा अध्ययन किया. उन्होंने इसकी जिम्मेदारी कंसलटिंग इंजीनियर प्रवीण चौकसे को दी.

इंजीनियर प्रवीण चौकसे खुद इसके लिए आगरा आए और ताजमहल के क्षेत्रफल की बारीकियों को पूरी तरह से नोट किया. आखिरकार तीन साल की कड़ी मशक्कत के बाद ये आलीशान घर तैयार हो गया. प्रवीण चौकसे ने घर की नक्काशी के लिए बंगाल और इंदौर के कारीगरों को बुलाया. घर का क्षेत्रफल 90X90 का है. बेसिक स्ट्रक्चर 60X60 का है. जबकि, डोम 29 फीट ऊंची है. घर की फ्लोरिंग राजस्थान के मकराना के कारीगरों द्वारा की गई जबकि फर्नीचर सूरत और मुंबई के कारीगरों ने तैयार किया. इसमें आगरा के भी कारीगरों की भी मदद ली गई.
