आगरालीक्स… आगरा के बाजारों में अमूल का बटर की कमी का देसी घी पर भी असर। खुला और डेयरियों पर देसी घी महंगा। जानिये क्या है कमी व तेजी का कारण।
सर्दियों में बढ़ जाती है देसी घी और मक्खन की मांग

सर्दियों में देसी घी और मक्खन की मांग बढ़ जाती है। साथ ही सहालग में भी देसी घी और बटर का इस्तेमाल ज्यादा होता है लेकिन इस बार दीपावली के बाद से ही दोनों चीजों में धीरे-धीरे तेजी दर्ज की जा रही थी लेकिन बाजार में अमूल बटर बाजार में कम आ रहा है।
अमूल के बटर की कमी हुई तो बढ़ा दिए पैसे
बाजार में जो अमूल के बटर के पैसे भी बढ़ गए हैं। अमूल का सौ ग्राम का बटर का पैकेट 50 रुपये से 54 रुपये का हो गया है। दुकानदारों द्वारा अनुमान लगाया जा रहा है कि नया माल आने पर अमूल बटर के दाम बढ़ जाएंगे।
खुला और डेयरियों का देसी घी महंगा
अमूल के बटर की कमी से देसी घी पर भी असर पड़ा है। बाजार में ब्रांडेड घी 600 रुपये प्रतिकिलो पर पहुंच गया, जो एक सप्ताह पूर्व 550 रुपये किलो चल रहा था। डेयरी संचालकों ने भी देसी घी के दाम बढ़ा दिए हैं। आगरा की प्रसिद्ध डेयरी का देसी घी पांच दिन पहले 540 रुपये प्रतिकिलो था, जो अब 600 रुपये प्रतिकिलो हो गया है। इस डेयरी पर मक्खन 480 रुपये प्रतिकिलो मिल रहा है, जबकि क्रीम 300 रुपये प्रतिकिलो और पनीर 285 रुपये प्रतिकिलो पर बिक रहा है।
मदिया कटरा स्थित अमूल डेयरी की एजेसी पर अमूल का बटर उपलब्ध नहीं है, जबकि देसी घी के दामों में कोई बढ़ोत्तरी नहीं हुई है। अमूल का 500 एमएल देसी घी 285 रुपये की दर पर उपलब्ध है।
पशुओं में लंपी वायरस से दुग्ध उत्पादन कम होने से बढ़े दाम
अमूल बटर की बाजार में कमी और देसी घी के दामों में उछाल का कारण दुग्ध उत्पादन में कमी होना है। इसकी वजह है इस बार पशुओं में लंपी वायरस का होना, जिसकी वजह से दुग्ध उत्पादन में कमी आई है। पशुपालकों का कहना है कुछ राज्यों में लंपी वायरस की वजह से बहुत से पशुधन का नुकसान हुआ है। साथ ही लंपी वायरस से पीड़ित होने वाले गाय-भैंस की दूध देने की क्षमता कम हुई है, जिसका उसर दुग्ध उत्पादो पर प़ा है और वह महंगे हो गए हैं अथवा बाजार में कम आ रहे हैं।