आगरालीक्स …महिलाएं ही नहीं पुरुष भी निसंतानता के कारण हैं, निसंतानता के मामलों में 50 फीसद मामलों में पुरुषों में कमी होती है, आगरा में पुरुषों में स्पर्म की कमी और उसकी सक्रियता पर इंडियन सोसायटी फॉर एसिस्टेड रिप्रोडक्शन, यूपी चैप्टर की आगरा के होटल रेडिसन ब्लू में सोमवार को कार्यशाला आयोजित की गई।
कनाडा के चीफ एंड्रोलॉजिस्ट डॉ डेविड मोटीनर ने कहा कि कि निसंतानता के 50 पफीसद मामलों में पुरुषों में कमी होती है। इसके साथ ही 50 फीसद पुरुषों के शुक्राणु निष्क्रिय हैं या शुक्राणुओं की संख्या बहुत कम है। यह तेजी से बढ रहा है, इसके पीछे तनाव के साथ ही स्मोकिंग, एल्कोहल सहित अन्य कारण हैं। इस वजह से निसंतानता के केस तेजी से बढ रहे हैं और महिलाओं के बराबर पुरुष भी इसके जिम्मेदार हैं। इस दिशा में काम करने की जरूरत है, पुरुषों के शुक्राणुओं की संख्या बढाने के साथ ही निष्क्रिय शुक्राणुओं को सक्रिय करने पर भी काम चल रहा है। कम शुक्राणु होने पर भी गर्भधारण कराया जा सकता है। डॉ नरेंद्र मल्होत्रा ने कहा कि टेस्ट टयूब बेबी के रिजल्ट भारत में सबसे अच्छे हैं, इन्हें और बेहतर करने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। इसके लिए अच्छी लैब विकसित की जा रही हैं, यहां टेस्ट टयूब बेबी किए जा सकें। एसएन मेडिकल कॉलेज, आगरा की प्राचार्य डॉ सरोज सिंह, डॉ एमएस अग्रवाल, डॉ संतोष सिंघल, डॉ रजनी पचौरी, डॉ अमित टंडन, डॉ निहारिका आदि मौजूद रहे।
आम लोगों के हित में नहीं है सरोगेसी बिल
डॉ जयदीप मल्होत्रा ने कहा कि सरोगेसी बिल बनाते समय स्त्री रोग विशेषज्ञों से चर्चा नहीं की गई, यह गलत है। पीसीपीएनडीटी और सरोगेसी बिल में किए गए संशोधन आम लोगों के हित में नहीं हैं। उन्होंने कहा कि नए सरोगेसी बिल के बाद अपने परिचित ही सरोगेट मदर बन सकती हैं, लेकिन जिस केस में कोई रिश्तेदार सरोगेट मदर बनने के लिए तैयार नहीं होगा, इस तरह के मामलों में दंपति संतान का सुख नहीं भोग सकेंगे।
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