आगरालीक्स …आगरा के केंद्रीय हिंदी संस्थान में एक महीने पहले आई त्रिनिदाद एंड टोबेगो की छात्रा रेणुका बल्देव (25) के पोस्ट ने खलबली मचा दी, त्रिनिदाद एबेंसी और विदेश मंत्रालय भारत सरकार के हस्तक्षेप के बाद छात्रा को आगरा से उसके देश भेज दिया गया। वह रविवार को अपने घर त्रिनिदाद एंड टोबेगो पहुंच गई।
चार्लिवेली त्रिनिदाद निवासी छात्रा रेणुका बल्देव (25) महात्मा गांधी इंस्टीटयूट, त्रिनिदाद में पढ रही थी, यह इंस्टीटयूट इंडियन हाई कमीशन द्वारा चलाया जाता है। यहां से आगरा के केंद्रीय हिंदी संस्थान में हिंदी पढने के लिए स्कोलरशिप के लिए आवेदन मांगे गए, जनवरी 2016 में रेणुका बल्देव ने आवेदन किया और दो छात्रों का चयन हुआ, जिसमें से एक वह भी थी, वह इससे उत्साहित थी। क्योंकि केंद्रीय हिंदी संस्थान में उन्हें हिंदी सीखने के साथ ही भारत की संस्क्रति को भी जानने का मौका मिल रहा था। रेणुका चार अगस्त को आगरा आ गई और केंद्रीय हिंदी संस्थान के हॉस्टल में रहने लगी। रेणुका ने एक सितंबर को पोस्ट की और मेल भी किया, इसमें उन्होंने लिखा कि आगरा के हिंदी संस्थान के हॉस्टल में आवारा कुत्तों की तरह जिंदगी जीनी पड रही है। मेस में चूहे घूमते रहते हैं, गंदगी रहती है, खराब क्वालिटी का खाना खाने के लिए दिया जा रहा है। पीने के लिए दूषित पानी है, संस्थान में रह रहे छात्र फूड प्वाइजनिंग के शिकार हो चुके हैं, इनका इलाज भी नहीं कराया गया, एंबुलेंस तक नहीं बुलाई गई, डॉक्टर चेकअप किए बिना ही दवा रहे हैं। आवारा कुत्ते हॉस्टल के कमरों के बाहर सुबह सुबह गंदगी करते हैं। टॉयलेट गंदे हैं, इसकी शिकायत करो तो कहा जाता है कि हिंदी सीखनी है तो इसी हालत में रहना होगा। रेणुका ने अपनी पोस्ट में घर वापस लौटने के लिए पब्लिक अपील की, इसके बाद त्रिनिदाद एंड टोबेगो के मीडिया में यह मामला छा गया। त्रिनिदाद एबेंसी और विदेश मंत्रालय भारत सरकार को हस्तक्षेप करना पडा।
वाई फाई ठप, बिजली गुल
छात्रा ने यह भी कहा कि संस्थान में वाई फाई की सुविधा ठप रहती है, इससे वह अपने परिजनों से संपर्क नहीं कर पा रही है। बिजली अधिकांश समय गायब रहती है, हॉस्टल के कमरों में एसी नहीं हैं। इससे यहां रहना मुश्किल है।
रविवार को पहुंची घर
शुक्रवार को पुलिस एस्कार्ट के साथ रेणुका को दिल्ली इंटरनेशनल एयरपोर्ट तक ले जाया गया, वहां से वह यूएसए होती हुई रविवार को अपने घर पहुंच गई। त्रिनिदाद एंड टोबेगो मीडिया के अनुसार अपने घर पहुंचने के बाद रेणुका ने कहा है कि केंद्रीय हिंदी संस्थान में नारकीय हालत में रह रहे छात्र बीमार पड रहे हैं, उनका इलाज तक कराने का बंदोबस्त नहीं किया जा रहा है। संस्थान के अधिकारी कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं। उनके पिता प्रेमचंद बल्देव अपनी बेटी के घर वापस लौटने से खुश हैं।
हर छात्र को पांच लीटर शुद्ध पानी
प्रो. एनके पांडे निदेशक केंद्रीय हिंदी संस्थान का मीडिया से कहना है कि छात्रा अपने देश जा चुकी है। समस्याओं का समाधान कराया जा रहा है। प्रत्येक छात्रा को पांच लीटर शुद्ध पानी उपलब्ध कराया जा रहा है।
(इंटरनेट फोटो )
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