आगरालीक्स …आगरा में कोचिंग का धंधा 50 करोड का है, लेकिन अधिकांश सेंटरों का मेडिकल और इंजीनियरिंग एंट्रेस एग्जाम क्रेक करने का रिजल्ट महज एक फीसद है। कोचिंग सेंटर में 100 बच्चे पढ रहे हैं तो उसमें से एक का ही चयन हो रहा है। कई रिपोर्ट में स्पष्ट हो चुका है कि कोचिंग सेंटर से ही सफल होना संभव नहीं है, इसके लिए सेल्फ स्टडी जरूरी है। ऐसे में कोचिंग पर लाखों रुपये क्यों खर्च किए जाएं।
नीट टू का रिजल्ट आ चुका है, इससे पहले जेईई एडवांस का रिजल्ट घोषित हुआ था। इसमें कोचिंग सेंटर से एक फीसद छात्र ही सपफल हुए हैं। जबकि इन सेंटरों पर 200 से 800 छात्र पढ रहे हैं। इसके लिए 80 से एक लाख रुपये लिए जा रहे हैं। यहां तक कि तमाम बच्चे शहर में घर होने के बाद भी कोचिंग सेंटर के हॉस्टल में रह रहे हैं। इन सेंटरों पर सुबह से शाम तक क्लासेज लगती हैं, दूसरे सेंटर से अपने सेंटर को अव्वल दिखाने के लिए कोचिंगों की साज सजावट और रिसेप्शन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
पीएमटी में फेल दे रहे कोचिंग
कई सेंटरों में पीएमटी में फेल हो चुके अभ्यर्थी अब मेडिकल की तैयारी करा रहे हैं। कई ने तो अपने अपने खुद के कोचिंग सेंटर खोल लिए हैं। आलम यह है कि निर्भय नगर, खंदारी, भगवान टॉकीज क्षेत्र में ही तमाम कोचिंग सेंटर हैं। यहां सुबह से शाम तक छात्र छात्राओं की भीड लगी रहती है।
हाईस्कूल के बाद से कोचिंग
कोचिंग सेंटर संचालकों ने नया धंधा शुरू कर दिया है। अब हाईस्कूल के बाद से कोचिंग कराई जा रही है। इसके लिए छात्रों को कोचिंग संचालक डमी कॉलेज में प्रवेश दिलवा देते हैं, इसकी फीस छात्रों से ली जाती है। इन छात्रों को कोचिंग में पढाते हैं, तर्क दिया जाता है छात्रों को तैयारी करने के लिए दो साल मिल जाएंगे, लेकिन इसके बाद भी सफलता का ग्राफी नहीं बढ सका है।
कहां करें कोचिंग और कब
विशेषज्ञों के अनुसार कोचिंग का फायदा ऐसे छात्रों को है जो पढने में तेज हैं, सामान्य छात्र कोचिंग से तैयारी करते हैं तो उनके सपफल होने की उम्मीद नहीं होती है। साथ ही कोचिंग एक माध्यम से है जिसमें एग्जाम का पैटर्न और प्रैक्टिस करा दी जाती है। मगर, सेल्फ स्टडी बहुत जरूरी है। इसलिए कोचिंग का चयन करते समय वहां लगे सक्सेज के बोर्ड के बजाय फैकल्टी को देखें, वहां से पढ रहे छात्रों से भी पफीड बैक ले लें। इसके साथ ही छात्र को एक एक विषय की अलग अलग तैयारी भी कराई जा सकती है। इसी तरह हाईस्कूल के बाद तैयारी करना अच्छा है, लेकिन स्कूल की पढाई भी जरूरी है।
(इंटरनेट फोटो)
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