आगरालीक्स…साधु-संतों,बड़े-बुजुर्गों का आशीर्वाद मिलना सौभाग्य होता है।अब इसमें भी झिझक। खुश रहो…कहने तक सीमित। आपको कौन-कौन से आशीर्वाद याद हैं।
वरदान से कम नहीं होता है आशीर्वाद

समाज में साधु-संतों,बड़े-बुजुर्गों के आशीर्वाद किसी वरदान से कम नहीं समझा जाता है लेकिन पिछले कुछ समय से आशीर्वाद लेने और देने दोनों में काफी बदलाव आया है।
युवा पीढ़ी घुटने से हाथ लगाने में भी हिचकती
युवा पीढ़ी अपने से कुछ बड़े व्यक्ति के पैर छूने में भी हिचकते हैं और घुटने तक ही छूकर काम चला लेते हैं।
खुश रहने का आशीर्वाद देकर इतिश्री
सामने वाला भी इतना झुकने पर गले लगाकर पीठ थपथपा कर खुश रहने का आशीर्वाद देकर अपने कर्तव्य की इतिश्री कर लेता है।
माता-पिता बुजुर्गों से यह मिलते थे आशीर्वाद

समाज में घरों में सुबह अपने माता-पिता और बुजुर्गो के पैर छूने पर खूब दुआ मिलती थीं। माता-पिता उसकी तरक्की की भगवान से दुआ करते थे। दादा-दादी, नाना-नानी के आशीर्वाद होते थे, पढ़े-लिखे खूब बड़ा आदमी बने, खूब नाम हो, परिवार का नाम रोशन करे… जीता रहे मेरे बेटे.. जैसे तमाम आशीर्वाद होते थे और दिल से निकले आशीर्वाद फलदायी भी होते थे।
बुजुर्ग महिलाओं के दबाए जाते हैं पैर और मिलते हैं ढेरों आशीर्वाद
घरों में महिलाओं द्वारा अपनी बुजुर्ग महिलाओं बड़ी ननद, सास आदि के पैर छूने के साथ उनके घुटनों तक पैर चार-पांच बार दबाए जाते थे और उस दौरान दिल से निकलने वाले जो आशीर्वाद होते थे- तेरा सुहाग जीता रहे…, दूधों नहाए, पूतो फले…, बेटा-बेटी सुखी रहें… जैसे आशीर्वाद मिलने पर पूरा परिवार गद्गद हो जाता था और यह फलदायी भी होते है।
महिलाओं के लिए पुरुष के सीधे पैर छूना वर्जित
समाज में परंपरा है कि कोई महिला किसी भी पुरुष के घर, परिवार या कोई बाहरी व्यक्ति हो उसके सीधे पैर नहीं छू सकती। इसका कारण है कि व्यक्ति के शरीर की सीधी ऊर्जा महिला के शरीर में प्रवेश कर उसको प्रभावित कर सकती है। लेकिन महिलाएं अब सीधे पुरुष के चरण स्पर्श कर लेती हैं पर पुरानी महिलाएं इसके लिए अब भी युवतियों को इसके लिए समझाती हैं।
महिलाएं पल्लू से छूती थीं पुरुष की चरण रज
महिलाएं पुरुषों के लिए पैर छूने के लिए आगे बढ़ती थीं तो पुरुष दो कदम पीछे हटते थे। महिला उसके चरण रज को छू लेती थी लेकिन इसमें भी ध्यान रखा जाता था कि वह सीधे हाथ से नहीं बल्कि अपनी साड़ी के पल्लू से ही चरण रज को तीन बार छूकर आशीर्वाद लेती थी। अब यह परंपरा तो लगभग बिलकुल खत्म सी हो गई है।
दूल्हा-दुल्हन के सिर पर हाथ रखकर फोटो खिंचवाए और हो गई छुट्टी
शादी समारोह, रिशेप्शन पर स्टेज पर बैठे दूल्हा-दुल्हन के साथ फोटो खिंचवाए जाते हैं। इसमें से घर परिवार के बड़े बुर्जग पीछे आशीर्वाद की मुद्रा में खड़े हो जाते हैं लेकिन मुंह से आशीर्वाद का एक शब्द भी नहीं निकलता। फोटो खिंचा फिर छुट्टी।
घरों पर मांगने आने वाले भी देते ढेरों दुआएं
घरों पर मांगने आने वाले संत हों या भिखारी दरवाजे से ही तेज आवाज में दुआ लगाना शुरू कर देते थे, यह अब भी है लेकिन थोड़ा कम हो गया है, इनकी आवाजें होती हैं- तेरे घर के भंडार भरे रहें, तेरी आस-औलाद जीती रहें, बड़ा नाम होगा बाबू, गरीब की झोली भर दे.. भक्तों के घर से खाली नहीं जाते… बम-बम भोले के जयकारे के साथ शंखनाद या भजन भी गाते हैं।