आगरालीक्स… श्राद्ध पक्ष में कौओं के माध्यम से ही पितर भोजना ग्रहण करते हैं. जानिए पुराणों से कौओं के बारे में महत्व.
ज्योतिषाचार्य पंडित हृदय रंजन शर्मा ने बताया कि श्राद्ध पक्ष में कौए का महत्व बहुत अधिक माना गया है. इस पक्ष में यदि कोई भी व्यक्ति कौओं को भोजन कराता है तो यह भोजन कौओं के माध्यम से उसके पितर ग्रहण करते है। शास्त्रों में यह बात स्पष्ट बतलाई गई है कि कोई भी क्षमतावान आत्मा कौए के शरीर में विचरण कर सकती है।
कौवे से जुड़े शकुन और अपशकुन का रहस्य
ज्योतिषाचार्य पंडित हृदय रंजन शर्मा ने बताया कि प्राचीन समय के ऋषियों—मुनियों ने अपने शोध में बताया था कि प्रत्येक जानवर के विचित्र व्यवहार और हरकतों का कुछ न कुछ प्रभाव अवश्य होता है। जानवरों के संबंध में कई बातें हमारे पुराणों औ ग्रंथों में भी विस्तार से बतलाई गई हैं। हमारे सनातन धर्म में माता के रूप में पूजनीय गाय के संबंध में बहुत सी बातें आप लोग जानते हैं। परंतु आज हम जानवरों के संबंध में पुराणों से ली गई कुछ ऐसी बातों के बारे में बताएंगे, जो आपने पहले कभी भी किसी से नहीं सुनी होगी। जानवरों से जुड़े रहस्यों के संबंध में पुराणों में बहुत ही विचित्र बातें बतलाई गई, जो किसी को आश्चर्य में डाल देंगी।
कौए का रहस्य
कौए के संबंध में पुराणों बहुत ही विचित्र बाते बतलाई गई है मान्यता है कि कौआ अतिथि आगमन का सूचक और पितरों का आश्रय स्थल माना जाता है। हमारे धर्म ग्रंथ की एक कथा के अनुसार इस पक्षी ने देवताओं और राक्षसों के द्वारा समुद्र मंथन से प्राप्त अमृत का रस चख लिया था। यही कारण है कि कौआ की कभी भी स्वाभाविक मृत्यु नहीं होती। यह पक्षी कभी किसी बीमारी अथवा अपने वृद्धा अवस्था के कारण मृत्यु को प्राप्त नहीं होता। इसकी मृत्यु आकस्मिक रूप से होती है।

कौए की मृत्यु के दिन साथी भोजन नहीं ग्रहण करते
यह बहुत ही रोचक है कि जिस दिन कौए की मृत्यु होती है। उस दिन उसका साथी भोजन ग्रहण नहीं करता। ये आपने कभी ख्याल किया हो तो यह बात गौर देने वाली है कि कौआ कभी भी अकेले में भोजन ग्रहण नहीं करता। यह पक्षी किसी साथी के साथ मिलकर ही भोजन करता है।
20 इंच का होता है
कौआ की लंबाई करीब 20 इंच होता है। यह गहरे काले रंग का पक्षी है। जिनमें नर और मादा दोनों एक समान ही दिखाई देते हैं। यह बगैर थके मीलों तक उड़ सकता है। कौए के बारे में पुराण में बतलाया गया है कि किसी भविष्य में होने वाली घटनाओं का आभास पूर्व ही हो जाता है।
पितरों का आश्रय स्थल
श्राद्ध पक्ष में कौए का महत्व बहुत ही अधिक माना गया है। इस पक्ष में यदि कोई भी व्यक्ति कौओं को भोजन कराता है तो यह भोजन कौआ के माध्यम से उसके पितर ग्रहण करते है। शास्त्रों में यह बात स्पष्ट बतलाई गई है कि कोई भी क्षमतावान आत्मा कौए के शरीर में विचरण कर सकती है।
भादों महीने के 16 दिन कौआ हर घर की छत का मेहमान बनता है। ये 16 दिन श्राद्ध पक्ष के दिन माने जाते हैं। कौए और पीपल के वृक्ष को पितृ प्रतीक माना जाता है। इन दिनों कौए को खाना खिलाकर और पीपल को पानी पिलाकर पितरों को तृप्त किया जाता है।
कौवे से जुड़े शकुन और अपशकुन
यदि आप शनिदेव को प्रसन्न करना चाहते हो कौआ को भोजन करना चाहिए।
यदि आपके मुंडेर पर कोई कौआ बोले तो मेहमान अवश्य आते है।
यदि कौआ घर की उत्तर दिशा से बोले तो समझे जल्द ही आप पर लक्ष्मी की कृपा होने वाली है।
पश्चिम दिशा से बोले तो घर में मेहमान आते है।
पूर्व में बोले तो शुभ समाचार आता है।
दक्षिण दिशा से बोले तो बुरा समाचार आता है।
कौवे को भोजन कराने से अनिष्ट व शत्रु का नाश होता है।