आगरालीक्स… आगरा मंडल के जवाहर बाग कांड की जांच इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सीबीआई को सौंप दी है। गुरुवार को मामले की जांच सीबीआई से कराने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने ये फैसला लिया है। कोर्ट यूपी पुलिस के जांच के तरीकों से संतुष्ट नहीं थी।
हर रोज हो रही थी सुनवाई
सरकारी मैदान जवाहर बाग से अवैध कब्जा खाली कराने के दौरान दो पुलिस अधिकारी सहित 21 लोग मारे गए थे। इलाहाबाद हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस डीबी भोंसले और जस्टिस यशवंत वर्मा की खंडपीठ ने आदेश दिया था कि अश्विनी उपाध्याय और विजय पाल तोमर तथा अन्य की ओर से दायर जनहित याचिका पर रोजाना सुनवाई होगी, जिसके बाद आज ये फैसला आया है।
गुरुवार 2 जून 2015 को मथुरा के जवाहर बाग की 280 एकड जमीन पर 15 मार्च 2014 से रह रहे स्वाधीन भारत विधिक संगठन के तीन हजार लोगों को बाहर निकालने के लिए पुलिस पहुंची थी। उपद्रवियों ने पुलिस पर हमला बोल दिया, इससे एसपी सिटी मुकुल द्विवेदी, एसओ फरह संतोष कुमार की मौत हो गई। रामवृक्ष यादव सहित उपद्रवियों की भी मौत हुई थी।
यह है जवाहर बाग प्रकरण
एक जनवरी, 2014 को कथित सत्याग्रहियों ने मथुरा स्थित जवाहर बाग में डेरा डाला था। करीब एक हजार लोग पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और मध्य प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से यहां पहुंचे थे। वे मध्य प्रदेश के सागर से दिल्ली जंतर-मंतर पर पहुंचने के लिए चले थे। यहां डेरा जमाने के बाद इन लोगों का जवाहर बाग में स्थापित जिला उद्यान अधिकारी कार्यालय के कर्मचारियों से विवाद होने लगा। उन्होंने आम, आंवला, बेर सहित अनेक बाग उजाड़ दिए। ठेकेदार के साथ मारपीट की। प्रशासनिक अफसरों ने इस समस्या को सुलझाने कोशिश की तो खुद को सत्याग्रही बताने वालों ने इन पर हमला कर दिया। तत्कालीन सिटी मजिस्ट्रेट सहित पुलिस अधिकारियों ने किसी तरह से अपनी जान बचाई थी। ऐसे कई मामलों में 12 से अधिक रिपोर्ट दर्ज की गई हैं। अब इनकी संख्या तीन हजार के करीब बताई जाती है।
रामवृक्ष यादव
कथित सत्याग्रहियों का नेतृत्व रामवृक्ष यादव नाम का व्यक्ति कर रहा है। यह उनके साथ ही मध्यप्रदेश के सागर से दिल्ली के लिए चला था। इसके बारे में ज्यादा जानकारी उपलब्ध नहीं है। हां, जब भी प्रशासन से कथित सत्याग्रहियों का टकराव हुआ, रामवृक्ष यादव की ओर से ही बयान जारी किए गए।
Leave a comment