
एक्साइज डयूटी के विरोध में सराफा कारोबारी 33 दिन से हडताल पर हैं और धरना दे रहे हैं। यह पफैसला मोदी सरकार ने लिया है, इसलिए भाजपा नेता भी खुलकर सामने नहीं आ रहे हैं। यही नहीं, अन्य राजनैतिक दल भी इस मुददे को कैश करने में चूक गए हैं। इसके चलते सराफा कारोबारियों की हडताल के बाद भी एक्साइज डयूटी वापस नहीं ली गई है। अब सराफा एसोसिएशन अन्य व्यापारिक संगठनों के साथ मिलकर अपनी ताकत दिखाना चाहती है, इसके लिए सोमवार को बाजार बंद रखने की अपील की गई है।
इन्होंने दिया समर्थन
नेशनल चैंबर, उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल, आगरा मंडल व्यापार संगठन, आगरा क्लॉथ मर्केंटाइल एसोसिएशन, मोती गंज खाद्य व्यापार समिति, आगरा व्यापार समिति सहित अन्य स्थानीय व्यापारिक संगठनों ने बंद का समर्थन किया है।
एक्साइज हटाओ, भले कस्टम ड्यूटी बढ़ा लो
श्री सराफा कमेटी ने वित्तमंत्री को भेजे ज्ञापन में कहा है कि केंद्र सरकार आयात होने वाले सोने पर 10 फीसदी कस्टम ड्यूटी वसूल रही है। यह सोना रॉ मैटेरियल के रूप में प्रयोग होता है और इसका महज 50 फीसदी ही आभूषणों में उपयोग हो पाता है। अगर राजस्व ही बढ़ाना है तो कस्टम ड्यूटी 10 की जगह 11 प्रतिशत कर दें। इससे एक्साइज की अपेक्षा कहीं ज्यादा टैक्स मिल जाएगा।
सोने, हीरे के आभूषणों पर केंद्र सरकार दो बार एक्साइज ड्यूटी लगाने का प्रयास कर चुकी है, लेकिन दोनों ही बार व्यापारियों के कड़े विरोध के कारण कदम पीछे खींचने पड़े। साल 2005 में केंद्र सरकार ने दो प्रतिशत एक्साइज लगाया था, जबकि 2012 में एक फीसदी ड्यूटी लगाई गई। दोनों ही बार व्यापारियों ने अनिश्चितकालीन बंदी कर सरकार को रोल बैक के लिए मजबूर कर दिया। यह तीसरा मौका है, लेकिन व्यापारी एक्साइज ड्यूटी के खिलाफ लंबे आंदोलन की तैयारी कर रहे हैं।
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