
मुश्किल से 12-14 कंसलटेंट ओपीडी में बैठ रहे है और वहीं से दवा लिखकर मरीजों को वापस भेज रहे है। गंभीर मरीजों को अस्पताल में न तो भर्ती किया जा रहा है और न ही ऑपरेशन आदि का काम हो रहा है।
डॉक्टरों का कहना है कि सिर्फ 12-14 कंसलटेंट के भरोसे स्वास्थ्य सेवाएं नहीं चल सकती। भर्ती एवं ऑपरेशन आदि की स्थिति में पूरी टीम की जरूरत होती है। पहले से वार्ड में भर्ती मरीजों को कंसलटेंट जरूर देख रहे है।
इसके अतिरिक्त आईसीयू, सीसीयू एवं सीपीडब्लू आदि में डॉक्टरों की ड्यूटी लगी हुुई है। जानकारों की माने तो मेडिकल कॉलेज में सीनियर रेजीडेंट, जूनियर रेजीडेंट एवं इंटर्नशिप मिलाकर करीब सवा छह सौ डॉक्टर है और स्वास्थ्य सेवाएं बनाए रखने में इनकी महत्वपूर्ण भूमिका है। सीएमओ डॉ. एहतेशाम का कहना है कि इन मौतों को हड़ताल से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। वृहस्पतिवार को सुबह में कासगंज से एक बेहद गंभीर मरीज को लेकर परिजन अस्पताल पहुंचे।
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