आगरालीक्स…सास को सिर पर बिठाकर ब्रज की 84 कोस परिक्रमा में छाप छोड़ गई बहू काजल. बुजुर्गों के प्रति अटूट प्रेम, सेवा और त्याग की अनूठी मिसाल पेश की…जानिए कौन है काजल, कैसे सास की इच्छा पूरी करने का लिया संकल्प..
पुरुषोत्तम मास में ब्रज की 84 कोस की परिक्रमा का अपना अलग महत्व है. इस साल पुरुषोत्तम मास में काफी संख्या में श्रद्धालु 84 कोस की परिक्रमा करने के लिए निकले. लेकिन हरियाणा की रहने वाली लोक गायिका काजल चौधरी ने इस ब्रज 84 कोस की परिक्रमा में अपनी ऐसी छाप छोड़ी है जिसने युवाओं को बुजुर्गों के प्रति अटूट प्रेम, सेवा और त्याग की अनूठी मिसाल पेश की है. हरियाणा की लोकगायिका काजल चौधरी ने अपनी 90 साल की साल चंद्री देवी को प्लास्टिक के टब में बैठाकर अपने सिर पर उठाकर ब्रज की 84 कोस यानी करीब 250 किलोमीटर की पैदल परिक्रमा को आज पूरा कर लिया है.सास को मानती है सगी मां
भजन गाकर अपने परिवार को पालने वाली काजल अपनी सास को सगी मां मानती है. काजल चौधरी पेशे से हरियाणवी सिंगर और भजन गायक हैं. काजल की जिंदगी का सफर बेहद संघर्षों से भरा रहा है. करीब 18 साल पहले सक सड़क हादसे में उनके पति की मौत हो गई. पति के जाने के बाद अनपढ़ होने के बावजूद काजल ने हिम्मत नहीं हारी और अकेले ही अपने बच्चों के पालन पोष्ज्ञण और घर चलाने की पूरी जिम्मेदारी कंधों पर उठा ली. काजल अपनी सास को सिर्फ सास नहीं बल्कि अपनी सगी मां मातनी है.
बुजुर्ग सास के मन में उठी ब्रज धाम की परिक्रमा की इच्छा
कुछ साल पहले बुजुर्ग सास चंद्री देवी को ब्रज धाम की पवित्र परिक्रमा करने की इच्छा जागी. वे पैदल नहीं चल सकती थी. लेकिन काजल ने जब उनकी यह इच्छा जानी तो काजल ने अपनी भक्ति और शक्ति का परिचय देते हुए उन्हें सिर पर प्लास्टिक के टब में बिठाकर यात्रा कराने का कठिन फैसला लिया. काजल चौधरी ने अपनी सास की इस इच्छा को पूरा करने के लिए 31 मई को यह कठिन यात्रा शुरू की.
काजल चौधरी ब्रज 84 कोस यात्रा में लोगो के लिए प्रेरणा बन गई. अपनी सास को सिर पर बिठाकर परिक्रमा देने जा रही काजल को जब लोगों ने देखा तो उसको न सिर्फ सराहा बल्कि जगह—जगह स्वागत और सत्कार किया. काजल और उसकी सास जहां जहां से जा रहे थे वहां वहां लोग उनका स्वागत कर रहे थे. कोई काजल को आशीर्वाद दे रहा है तो कोई पैर छूकर सम्मान. स्वागत होते देख काजल चौधरी भावुक हो गई और उनहोंने सभी को धन्यवाद दिया. परिक्रमा के दौरान रास्ते में मिले इस असीम प्यार, आदर और सम्मान को देखकर काजल खुद भी अपने आंसू नहीं रोक पाई और उनहोंने सभी का धन्यवाद दिया. काजल का कहना है कि आज उन्हें जो सम्मान मिल रहा है, वह उनके और उनके परिवार के लिए बेहद फख्र की बात है.
हर दिन 45 किमी चली काजल
ब्रज चौरासी कोस की परिक्रमा में काजल अपनी सास को सिर पर बिठाकर हर दिन 45 किमी चली. काजल चौधरी परिक्रमा मार्ग में जहां से गुजरती, वहां का नजारा देखने लायक होता. सोशल मीडिया पर भी छाई इस अनोखी जोड़ी को खूब देखा जा रहा है और प्यार मिल रहा हे. काजल चौधरी की तस्वीरें और वीडियो इंटरनेट पर खूब वायरल हो रहे हैं.