आगरालीक्स …..आगरा में सूरज के तेवर गर्म होते ही डायरिया यानी दस्त की समस्या बढ़ गई है, इसकी रोकथाम के लिए उठाए जा रहे कदम।

सीएमओ डॉ. अरुण श्रीवास्तव ने बताया कि 22 जून से शुरू हो रहे पखवाड़े के तहत बाल्यवस्था में दस्त के दौरान ओआरएस व जिंक के उपयोग के प्रति जागरुकता को बढ़ावा दिया जाएगा। पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों में दस्त के प्रबंधन व उपचार के लिए गतिविधियां को बढ़ावा देना, साथ ही उच्च प्राथमिकता व अतिसंवेदनशील क्षेत्र जैसे स्लम, शहरी झुग्गी व खानाबदोश क्षेत्रों में जागरुकता प्रदान करना है।
एसीएमओ आरसीएच डॉ. संजीव वर्मन ने बताया कि कुपोषित व अति कुपोषित बच्चों को डायरिया होने की अधिक संभावना हो सकती है। बार-बार डायरिया के कारण बच्चे कुपोषण का शिकार हो सकते हैं। इसलिए डायरिया से बचाव के लिए कुपोषित बच्चों पर विशेष ध्यान दिए जाने की आवश्यकता है।
-पखवाड़े के दौरान ऐसे परिवार, जिनमें पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चे हों।
-पांच वर्ष की उम्र के बच्चे दस्त रोग से ग्रसित हो, उन पर फोकस रहेगा।
-कम वजन वाले बच्चों को प्राथमिकता देना।
-सब सेंटर जहां पर एएनएम न हो या लंबी छुट्टी पर हों।
-अति संवेदनशील क्षेत्र अरबन स्लम, हार्ड टू रीच एरिया, खानाबदोश, निर्माण कार्य में लगे मजदूरों के परिवारों पर फोकस।
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बच्चों को दस्त आने पर यह बरतें सावधानी
-दस्त के दौरान बच्चों को तरल पदार्थ दिया जाना चाहिए।
-दस्त होने पर बच्चों को उम्र के अनुसार, 14 दिन तक जिंक की गोली अवश्य दी जाए।
-पीने के लिए स्वच्छ पेयजल का उपयोग किया जाए।
-उम्र के अनुसार शिशु/ बाल पोषण संबंधी परामर्श दिया जाए।
-डायरिया को फैलने से रोकने के लिए शौचालय का उपयोग करना।
-खाना बनाने से पहले व बच्चों का मल साफ करने के बाद साबुन से हाथ धोएं।