आगरालीक्स…आगरालीक्स के संपादक और रंगकर्मी स्व. श्री योगेंद्र दुबे जी की स्मृतियों से हो गईं आंखे नम…शोकसभा में अनेक प्रमुख संस्कृतिकर्मियों, साहित्यकारों, लेखकों और पत्रकारों ने किया उन्हें याद
हरियाली वाटिका में हुई शोकसभा
जीना इसी का नाम है, कलमकार, रंगमंच के सशक्त हस्ताक्षर, अपने विचारों से लोगों के दिलों दिमाग में जगह बनाने वाले, एक दीया की मानिंद, जिसके विचार तेज हवा में कभी भी न डगमगाया, ऐसे थे हम सब के प्रिय योगेंद्र दुबे जी, जिन्हें चुन्नू भाई के नाम से जानते हैं। रंगलीला द्वारा रविवार को हरियाली वाटिका घटिया आजम खां में आयोजित शोक सभा में आगरालीक्स के संपादक योगेंद्र दुबे जी से जुड़ी स्मृतियों से आंखें नम हो गईं, गला भर्रा गया। योगेंद्र दुबे जी का 67 साल की उम्र में ह्रदयघात से 28 अक्टूबर दोपहर में निधन हो गया। उनके परिवार में पत्नी ममता दुबे, बेटा प्रज्ञान दुबे, पुत्रवधु अनुराधा दुबे, पुत्री इति, दामाद मोहित पनवार, नाती ओजस दुबे व धेवता कबीर हैं।

स्व. श्री दुबे के योगदान को किया याद
शोक सभा में मौजूद शहर के अनेक प्रमुख संस्कृतिकर्मियों, साहित्यकारों, लेखकों और पत्रकारों ने भगत, थिएटर और पत्रकारिता के क्षेत्र में श्री दुबे के योगदान को याद किया. शोकसभा की अध्यक्षता वरिष्ठ पत्रकार विनोद भारद्वाज ने की. सभा की शुरुआत करते हुए वरिष्ठ आलोचक अखिलेश श्रोत्रिय ने श्री दुबे की लोक नाट्य ‘भगत’ की भूमिकाओं पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि मैंने उन्हें आधुनिक रंगमंच की भुमिकाओं में भी देखा था लेकिन लोक नाट्य अभिनेता के बतौर जिस तरह उन्होंने अपने अीिानेता का रूपांतरण किया उसका दूसरा उदाहरण नहीं मिलता.
इन्होंनें भी दी श्रद्धांजलि
वरिष्ठ रंगकर्मी मनमोहन भारद्वाज ने श्री दुबे के साथ अपने रंगकर्मीय रिश्तों को सझा करते हुए कहा कि उनके पास अपने सहअभिनेताओं के लिए मंच और पाश्र्वमंच की सभी मुश्किलों का जादुई इलाज होता था. दिल्ली से आए वरिष्ठ पत्रकार त्रिलोकीनाथ उपाध्याय ने कहा कि हमने न सिर्फ खबरों की कॉपी लिखने की कला उनसे सीखी बल्कि रिपोर्टिंग की बाराखड़ी का ज्ञान भी उन्हीं से लिया. आलोचक नसरीन बेगम, बृजराज सिंह और मधुरिमा शर्मा ने योगेंद्र दुबे के व्यक्त्त्वि के अनेक पहलुओं की चर्चा की. मंच से उन्हें श्रद्धांजलि देने वालों में वरिष्ठ गजलगो अशोक रावत, शायर अमीर अहमद जाफरी, वरिष्ठ कवि शलीा भारती, इतिहासकार डॉ. आरसी शर्मा, वरिष्ठ रंगकर्मी बसंत रावत, मनोज शर्मा, विनय पतसारिया, राजीव सिंघल, वरिष्ठ पत्रकार राजीव सक्सेना, भुवनेश श्रोत्रिय आदि थे.

ये लोग रहे मौजूद
खचाखच भरे सभागार में मौजूद लोगों में हिंदी के युवा आलोचक प्रियम अंकित, नारायण सिंह, हिमानी चतुर्वेदी, हरीश चिमटी, मालती कुशवाहा, रामभारत उपाध्याय, खवर हाश्मी, अहमर उमरी, दानिश उमरी, केके शर्मा, जेके शर्मा, राजीव शर्मा,चंद्रशेखर, अनिल दीक्षित, अनिल शर्मा, टोनी ुास्टर, रंजीत, सुरेंद्र यादव, रवि प्रजापति, मनीषा शुक्ला के अलावा श्री दुबे की बेटी इति, बेटा प्रज्ञान, भाई डॉ. विनोद दुबे व अन्य परिजन मौजूद रहे.
शोक प्रस्ताव पढ़ा
बाहर से आए वरिष्ठ पत्रकार राजेंद्र त्रिपाठी, प्रभात सिंह, सुभाष राय, दयाशंकर राय, विभांशु दिव्याल, प्रकाश श्रीवासतव, कत्थक नृत्यांगना काजल शर्मा, पीयूष श्रीवास्तव, लेखिका रानी सरोज गौरिहार, ज्योत्सना रघुवंशी, रंगकर्मी सोनम वर्मा, बृजमोहन श्रीवास्तव, सांस्कृतिक संस्था हम लोग और संकेत आदि के शोक संदेशों को युवा रंगकर्मी मन्नू शर्मा द्वारा पढ़ा गया. इस अवसर पर रंगलीला की ओर से वरिष्ठ रंगकर्मी मनेाज सिंह ने एक शोक प्रस्ताव पढ़ा जिसे वहां उपस्थित सभी ने पारित किया. शोक सभा का संचालन वरिष्ठ रंगकर्मी शिवेंद्र मल्होत्रा ने किया. रंगलीला निर्देशक अनिल शुक्ल ने वहां आए सभी आगुंतकों का धन्यवाद दिया.
