मथुरालीक्स…वृंदावन में संत प्रेमानंद से मिलने पहुंचे महाभारत के ‘युधिष्ठिर’. संत को सुनाया महाभारत का वो संवाद जिसमें राष्ट्र को बताया सर्वोपरि
वृंदावन के संत प्रेमानंद महाराज के दर्शन के लिए रोजाना सैकड़ों लोग पहुंच रहे हैं. इनमें कलाकारों से लेकर राजनतिक लोग भी शामिल हैं. सोमवार को प्रसिद्ध धारावाहिक महाभारत में युधिष्ठिर का किरदार निभाने वाले अभिनेता गजेंद्र चौहान भी संत का आशीर्वाद लेने के लिए पहुंचे. यहां उन्होंने संत को महाभारत का एक संवाद भी सुनाया. संत प्रेमानंद ने उन्हें आशीर्वाद प्रदान किया और कहा कि आपने हमारे धर्म के सबसे बड़े स्वरूप का अभिनय किया है.सोमवार सुबह करीब साढ़े सात बजे श्रीराधा केलिकुंज आश्रम पर पहुंचे अभिनेता गजेंद्र चौहान ने संत के दर्शन किया. संत प्रेमानंद ने चौहान का स्वागत करते हुए कहा कि हमारे धर्म के सबसे बड़े स्वरूप का अभिनय आपने किया है. युधिष्ठित तो साक्षात धर्म के अंश अवतार ही थे. इसके बाद गजेंद्र चौहान ने महाभारत सीरियल का एक संवाद सुनाने की अनुमति मांगी तो संत प्रेमानंद की अनुमति मिलने के बाद कहा कि ये संवाद उस समय का है जब पांचाली ने वनवास जाने से मना कर दिया. धर्मराज युधिष्ठिर ने अपने भाइयों और माता को समझाते हुए कहा था कि श्रीराम ये जानते थे कि मृग सोने का नहीं होता, फिर भी उसके आखेट पर चले गए तो क्या वह केवल लोभ था, क्या स्वयं सीताजी ये नहीं जानती थीं कि स्वर्ण मृग जैसा कोई पशु नहीं होता. इसके बाद उन्होंने एक और संवाद सुनाया वो इस तरह था कि कोई भी पुत्र, कोई थी पिता, कोई भी परिवार, कोई भी प्रतिज्ञा और कोई भी परंपरा राष्ट्र से ऊपर नहीं हो सकती.